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आत्महत्या से पहले सुरेंद्र कोली ने किसे किया आखिरी फोन? गहराया मौत का रहस्य

By Deep Singh BoraEdited By: Nirmala Bohra
Published: Fri, 18 Sep 2026 02:28 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 04:08 PM (IST)

निठारी कांड में उच्चतम न्यायालय से दोषमुक्त हुए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली है। उनकी मौत एक रहस्य बन गई है।

HighLights

  1. निठारी कांड के दोषमुक्त सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या।

  2. आत्महत्या से पहले खोखा मालिक द्वारा पैसों के लिए परेशान होने की बात बताई।

  3. 19 साल की कानूनी लड़ाई के बाद भी जीवन में नहीं मिली शांति।

जागरण संवाददाता, रानीखेत Surendra Koli Suicide: निठारी कांड में उच्चतम न्यायालय से बीते वर्ष दोषमुक्त सुरेंद्र कोली आत्महत्या के पीछे बड़ा रहस्य छोड़ गया। बीती रात उसने फोन कर पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को बताया था कि खोखा स्वामी उसे रुपयों के लिए परेशान कर रहा है और अगली सुबह उसने दुनिया ही छोड़ दी।

सुरेंद्र कोली 19 वर्षों की कानूनी लड़ाई लड़ने और सब कुछ बिखरने के बाद पिछले माह अपने गांव विशेष पूजन में हिस्सा लेने आया था। उसका मंगरूखाल स्थित पैतृक मकान पूरी तरह खंडहर हो चुका है।

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गांव में जिस किसी को सुरेंद्र कोली के आत्महत्या कर लेने का पता लगा, स्तब्ध रह गया। पूर्व ग्राम प्रधान जोगा सिंह ने कहा कि यकीन नहीं हो रहा कि सुरेंद्र कोली ऐसे जिंदगी खत्म कर देगा।

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कुछ दिन दिल्ली में ही रहा

सुरेंद्र कोली बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट से रिहा होने के बाद कुछ दिन दिल्ली में ही रहा था। वहां कुछ काम ढूंढने के बाद उसने मन बदल लिया और हरिद्वार आ गया। खोखा लेकर आजीविका चलाने लगा था। उसके सुख दुख में मददगार रहे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने उसे आर्थिक मदद भी दी थी।

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पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने बताया कि वह हरिद्वार रवाना हो गए हैं। बीती रात सुरेंद्र कोली ने उसे फोन पर बताया था कि उसे खोखा मुहैया कराने वाले एक किसान नेता ने खोखे का किराया बढ़ा दिया। उस पर रुपया देने का दबाव बना रहा है। इस मामले में कुछ मदद का आग्रह भी किया था।

2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड ने उससे सब कुछ छीन लिया। तब उसकी पत्नी गर्भवती थी। पुत्र को जन्म देने के बाद वह जेल में मिलने जाती थी। लगभग दस वर्ष पूर्व जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई, उसके बाद उसकी पत्नी का हौसला टूटता गया। 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उम्रकैद सुनाई थी।

बहू के घर छोड़ते ही फिर मां ने छोड़ दी दुनिया

2019 के आसपास सुरेंद्र की पत्नी सामाजिक तिरस्कार की डर से करीब 13 वर्षीय बेटे का भविष्य देख उसे लेकर गांव से चली गई थी। वह कहां है, किसी को नहीं पता। तब सुरेंद्र की मां कुंती देवी गांव में अकेली रह गई। वह कहती रही कि उसके गरीब बेटे को रसूखदारों ने बलि का बकरा बना दिया। बहू के जाने के कुछ ही माह बाद कुंती देवी ने भी दम तोड़ दिया।

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गांव से नाता तोड़ दिया था तीनों भाइयों ने

सबसे छोड़ा भाई आनंद कोली प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। सुरेंद्र से बड़ा भाई चंदन व छोटा मंगत दिल्ली में रहता है। निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की गिरफ्तारी के बाद तीनों भाइयों ने गांव से नाता तोड़ ही दिया था। पूर्व ग्राम प्रधान जोगा सिंह ने बताया कि सुरेंद्र कोली कुशल कारीगर था। हुनर का धनी था।