विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आखिर किन परिस्थितियों में सुरेंद्र कोली ने उठाया आत्महत्या जैसा कदम? जिसने किराए पर दी दुकान उसे भी नहीं पता थी सही पहचान

Published: Fri, 18 Sep 2026 02:18 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 02:43 PM (IST)

निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली, सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बावजूद सामाजिक बहिष्कार झेल रहे थे और हरिद्वार में जीवन बिता रहे थे।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, हरिद्वार। निठारी कांड के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने भले ही सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, लेकिन गांव में सामाजिक बहिष्कार के चलते हुए हरिद्वार में अपनी जिंदगी काट रहा था।

WhatsApp Image 2026-09-18 at 4.34.10 PM (1)

अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि कुछ दिन पहले उसने औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल में भी चाय की ठेली लगाई थी। वह  सदाराम के नाम से हरिद्वार में रह रहा था। सुरेंद्र कोहली बाद में देहरादून जाकर भी काम किया। दो महीने पहले फिर से वह हरिद्वार लौटा था और भूपतवाला में चाय का खोखा किराये पर लिया था।

उत्तरी हरिद्वार के संत बाहुल्य भूपतवाला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। सिंचाई विभाग की जमीन पर स्थानीय निवासियों ने अवैध रूप से धोखे और दुकानें बनाई हुई हैं। उन्हें में से एक खोखे के मालिक राजीव से सुरेंद्र कोली ने दो महीने पहले किराए पर खोखा लिया था।

यह भी पढ़ें- 'वो मुझे रुपयों के लिए परेशान कर रहा है...' फोन पर ये थे सुरेंद्र कोली के आखिरी शब्द, अगली सुबह दे दी जान

जिसने किराए पर दी उसे नहीं पता थी सही पहचान

राजीव ने पुलिस को बताया कि अभी तक वह नहीं जानता था कि उसका किराएदार सुरेंद्र कोली निठारी कांड का आरोपित रहा है। उसने अपना नाम सुरेंद्र और अल्मोड़ा का पता बताया था। आत्महत्या के बाद सुरेंद्र का जुड़ाव निठारी कांड से निकलने पर खोखा मलिक राजीव समेत आसपास के लोग दंग रह गए।

WhatsApp Image 2026-09-18 at 4.34.10 PM

आस-पास वालों ने पुलिस को बताया कि सुरेंद्र का व्यवहार बिल्कुल सामान्य था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ महीने पहले सुरेंद्र ने सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र में भी चाय की ठेली लगाई थी। वहां उसका काम नहीं चला। जिसके बाद वह देहरादून लौट गया था। वहां कोई काम धंधा कर रहा था। दो महीने पहले वह दोबारा हरिद्वार आया था।

यह भी पढ़ें- 2006 का नरकंकाल कांड और 2026 में फांसी का फंदा.. सुरेंद्र कोली के सुसाइड से कैसे दफन हो गए निठारी के खौफनाक राज?

रोशनाबाद में किराए पर कमरा

आसपास वालों से पुलिस को यह भी पता चला है कि सुरेंद्र ने सिडकुल क्षेत्र में चाय की ठेली लगाने के दौरान किराए पर कमरा लिया हुआ था। बीच-बीच में सुरेंद्र रोशनाबाद भी जाता था। कुछ समय पहले उसकी मां की भी मौत हो चुकी थी। परिवार में कोई नहीं था। इसीलिए वह हरिद्वार रह रहा था।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।