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निठारी कांड से अल्मोड़ा तक और फिर हरिद्वार में मौत, कैसे हुआ सुरेंद्र कोली की कहानी का अंत?

Published: Fri, 18 Sep 2026 02:56 PM (IST)Updated: Fri, 18 Sep 2026 03:13 PM (IST)

Surendra Koli Suicide: निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली, जिससे दो दशक पुराने इस मामले की यादें ताजा हो गईं।

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जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा। Surendra Koli Suicide: देश के बहुचर्चित निठारी कांड से करीब दो दशक तक जुड़े रहे अल्मोड़ा के सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

उसकी मौत के बाद एक बार फिर निठारी कांड और उसकी दहशत की याद आ गई। भले ही सुरेंद्र कोहली घटना के बाद से अपने पैतृक गांव में यदा-कदा आया हो। उसका मकान भी खंडहर हो चुका है। लेकिन उसकी मौत के बाद से अल्मोड़ा जिला फिर सुर्खियों में है।

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मंगरूखाल गांव का रहने वाला था सुरेंद्र 

सुरेंद्र कोली मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे क्षेत्र के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था। वह सातवीं तक पढ़ा था और रोजगार की तलाश में दिल्ली चला गया था। बाद में वह नोएडा में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने लगा।

दिसंबर 2006 में निठारी में बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल मिलने के बाद मामला देशभर में सुर्खियों में आया। इसके बाद कोली को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ कई मुकदमे चले।

इन मामलों में कोली को अलग-अलग अदालतों से कई बार मृत्युदंड सुनाया गया। हालांकि वर्षों चली न्यायिक प्रक्रिया में तस्वीर बदलती गई। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में उसे दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति बरकरार रखी।

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नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रिम्पा हालदार मामले में भी उसकी दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी। इसके साथ निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम दोषसिद्धि भी समाप्त हो गई और उसे बरी कर दिया गया। बरी होने के बाद कोली जेल से बाहर आया और बाद में हरिद्वार में रहने लगा।

शुक्रवार को उसकी मौत की सूचना ने एक बार फिर निठारी कांड की करीब दो दशक पुरानी कहानी को चर्चा में ला दिया। पुलिस फिलहाल मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है।

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मां कुंती को बेटे की बेगुनाही पर था भरोसा

अल्मोड़ा: सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी आखिरी समय तक अपने बेटे को निर्दोष मानती रहीं। करीब आठ वर्ष बाद 2014 में जेल में बेटे से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि यदि सुरेंद्र दोषी है तो उसे सजा मिले, लेकिन जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि वह बेटे को बचाने के लिए न्याय की हर चौखट पर जाएंगी।

इससे पहले 2007 में भी कुंती देवी और बहू शांति देवी ने सुरेंद्र पर लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। कुंती देवी ने मीडिया से कहा था कि उनके बेटे को फंसाया जा रहा है। उन्होंने उसके नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंढेर पर भी सवाल उठाए थे। बाद में सुरेंद्र कोली की मां की मृत्यु हो गई। मंगरूखाल स्थित पैतृक घर पर ताला लगा है और वह खंडहर हो चुका है।

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18 साल पहले पत्नी और दो बच्चों ने छोड़ दिया था गांव

अल्मोड़ा। निठारी कांड में लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले सुरेंद्र कोली के पीछे पत्नी शांति देवी और दो बच्चे हैं। 2007 में जब निठारी प्रकरण सुर्खियों में आया था, तब शांति देवी करीब 24 वर्ष की थीं और अल्मोड़ा के मंगरूखाल गांव में रहती थीं। उस समय उनकी तीन वर्ष की बेटी थी और जनवरी 2007 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया था।

तब उस समय शांति ने पति को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उसे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने कहा था कि कोठी में रहते हुए उन्हें वहां होने वाली घटनाओं की जानकारी नहीं थी। निठारी कांड के बाद 2008-09 में शांति दोनों बच्चों के साथ गांव से बाहर चली गईं।

चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था सुरेंद्र

अल्मोड़ा। सुरेंद्र कोली चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। परिवार मूल रूप से स्याल्दे क्षेत्र के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था। निठारी कांड के बाद परिवार बिखर गया और भाइयों का गांव से संपर्क भी कम हो गया।

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