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    बदरीनाथ के कपाट खुलने को लेकर तैयारियां शुरू, पुजारियों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को भेजा निमंत्रण

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 07:02 PM (IST)

    बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियों के तहत गाड़ू घड़ा तेल कलश शोभायात्रा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह यात्रा 7 अप्रैल को नरेंद्र नगर से डिमरी समु ...और पढ़ें

    डिमरी समुदाय के पुजारियों ने गाड़ू घड़ा कलश यात्रा प्रस्थान में ज्योतिर्मठ के आचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को निमंत्रण भेजा है।

    डिमरी समुदाय के पुजारियों ने गाड़ू घड़ा कलश यात्रा प्रस्थान में ज्योतिर्मठ के आचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को निमंत्रण भेजा है।

    HighLights

    1. बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारियां तेज

    2. गाड़ू घड़ा तेल कलश शोभायात्रा की प्रक्रिया शुरू

    3. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को निमंत्रण भेजा

    संवाद सहयोगी, जागरण, गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय होने के साथ इसकी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में गाड़ू घड़ा (तेल कलश) उत्सव शोभायात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। सात अप्रैल को यह यात्रा गाड़ू घड़ा के साथ नरेंद्र नगर राजदरबार से डिमरी समुदाय पुजारी द्वारा बदरीनाथ के लिए लाया जाएगा।

    डिमरी समुदाय के पुजारियों ने इस यात्रा में ऋषिकेश से आठ अप्रैल को बदरीनाथ धाम के लिए गाड़ू घड़ा कलश यात्रा प्रस्थान में ज्योतिर्मठ के आचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को निमंत्रण भेजा है।

    बदरीनाथ धाम पुजारी समुदाय की शीर्ष संस्था श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बुलावा भेजा गया है। साथ ही बुलावा पत्र लेकर पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी स्वयं काशी के लिए रवाना हुए हैं।

    बताया कि गाडू घड़ा कलश यात्रा प्रथम चरण में आठ अप्रैल को ऋषिकेश, नौ अप्रैल को श्रीनगर, 10 अप्रैल को यात्रा डिमरियों के मूल गांव लक्ष्मी नारायण मंदिर डिम्मर पहुंचेगी।

    गाडू घड़ा पूजा-अर्चना के बाद लक्ष्मी नारायण मंदिर के गर्भगृह में रखा जाएगा। द्वितीय चरण में 19 अप्रैल को पूजा अर्चना के बाद डिम्मर गांव से गाडू घड़ा बदरीनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगा।

    यह है धार्मिक महत्व

    गाडू घड़े में तिलों का तेल पिरोह कर भरा जाता है। इस पवित्र तेल को टिहरी राजदरबार नरेंद्र नगर में पूजा-अर्चना के साथ महारानी के अलावा सुहागन महिलाओं द्वारा पिरोया जाता है।

    तिलों के इस तेल से कपाट खुलने के बाद बदरी नारायण की प्रतिदिन अभिषेक पूजा में प्रयोग किया जाता है। कपाट खुलने पर यह तेल कलश भगवान के गर्भगृह में स्थापित हो जाता है।

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