चमोली के गोपीनाथ मंदिर की अनूठी होली: रंग खेलने के लिए देश-विदेश से उमड़ते हैं लोग
गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में होली का उत्सव देश-विदेश से लोगों को आकर्षित करता है। यह प्राचीन शिव मंदिर चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की शीतकालीन पूजा का स्थल ...और पढ़ें

गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में होली खेलते होल्यार। फाइल फोटो

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संवाद सहयोगी, गोपेश्वर (चमोली)। गोपेश्वर नगर ऐसा स्थान है जहां होली गोपीनाथ मंदिर के प्रांगण में मनाई जाती है।
इसमें शामिल होने के लिए नगरवासी दूर-दूर से घरों को लौटते हैं। अब तो देश विदेश से भी श्रद्धालु होली का उत्सव मनाने के लिए गोपीनाथ मंदिर पहुंचते हैं।
जिला मुख्यालय गोपेश्वर में शिव का पौराणिक मंदिर है, जहां भोलेनाथ विराजते हैं। इस मंदिर में चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की शीतकालीन पूजा भी होती है।
इन दिनों उत्तराखंड में बैठकी होली की धूम है। होल्यार हर गली, मुहल्ले, और सड़कों पर होली के गीत गा रहे हैं।

गोपीनाथ मंदिर की होली की मान्यता है कि यहां भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों संग रासलीला की थी। होली के उत्सव के दौरान यह नगरी में अलग ही रंगत दिखाई देती है और होल्यार मिलकर भोलेनाथ के संग होली खेलते हैं।
- होली के दौरान अबीर, गुलाल के रंग उड़ाए जाते हैं और ढोल की थाप और होली के गीतों पर होली खेली जाती है।
गोपेश्वर की होली पूरे देश भर में विख्यात है और यही कारण है कि गढ़कवि नरेंद्र सिंह नेगी हो या उत्तराखंडी व पांडवाज की टीम यहां कई शूटिंग की जा चुकी है।
गांव के कन्हैया लाल भट्ट कहते हैं कि 64 गांवों और मंदिर से जुड़े गांवों के लोग प्राचीनकाल से ही भगवान गोपीनाथ के सानिध्य में होली खेलते आए हैं।
जिस तरह से ब्रज में कान्हा के साथ होली मनाई जाती है। उसी तरह गोपेश्वर में भोले शंकर गोपीनाथ के साथ मिलकर होल्यार होली खेलते हैं जो देखने में बेहद भव्य और दिव्य होती है।
गोपीनाथ मंदिर का इतिहास
चमोली जिले के गोपेश्वर में स्थित प्राचीन गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव का मंदिर है, जिसका निर्माण कत्यूरी राजाओं ने करवाया था।
यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, रहस्यमयी पांच मीटर ऊंचे त्रिशूल और कामदेव को भस्म करने की पौराणिक कथा के लिए प्रसिद्ध है।
चतुर्थ केदार श्री रुद्रनाथ जी की शीतकालीन पूजाएं भी गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर में होती है।
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