विश्व धरोहर फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली, हिमखंड और रंग-विरंगे फूलों का अद्भुत नज़ारा
विश्व धरोहर फूलों की घाटी सोमवार से पर्यटकों के लिए खुल गई है। शुरुआत में हिमखंड और 20 से अधिक प्रजाति के रंग-बिरंगे फूल देखने को मिलेंगे, साथ ही दुर् ...और पढ़ें

चमोली जनपद में स्थित फूलों की घाटी का प्रवेश द्वार सोमवार सुबह आठ बजे खोला जाएगा।

समय कम है?
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देवेंद्र रावत, गोपेश्वर (चमोली)। देश-दुनिया के पर्यटक आज सोमवार से विश्व धरोहर फूलों की घाटी का दीदार कर सकेंगे। घाटी का प्रवेश द्वार सुबह आठ बजे खोला जाएगा।
शुरुआत में घाटी की सैर के दौरान पर्यटकों को लेगी नाले में हिमखंड के साथ 20 से अधिक प्रजाति के रंग-विरंगे फूलों का दीदार होगा। अभी घाटी की सैर के लिए आफलाइन पंजीकरण किए जा रहे हैं। रविवार देर शाम तक 20 से अधिक पर्यटक घाटी के बेस कैंप घांघरिया पहुंच चुके थे।
चमोली जिले में समुद्रतल से 12,995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली फूलों की घाटी एक जून से 31 अक्टूबर को पर्यटकों के लिए खुली रहती है। यहां जैवविविधता का खजाना बिखरा हुआ है। 500 से अधिक रंग-विरंगे फूलों के साथ यह घाटी दुर्लभ वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी है।

यहां आप हिमालयन थार, कस्तूरा मृग, हिम तेंदुआ सहित अन्य वन्य जीवों का दीदार कर सकते हैं। घाटी की विशेषता यह है कि यहां हर 15 दिन में अलग-अलग प्रजाति के फूल खिलते हैं, इससे ऐसा प्रतीत होता है, मानो घाटी रंग बदल रही है।
घाटी आने के लिए बदरीनाथ हाईवे पर ज्योतिर्मठ के पुलना पहुंचना पड़ता है। फिर शुरू होता है घांघरिया तक 10 किमी का पैदल सफर। यहां से घाटी तीन किमी के फासले पर है। रुकने की अनुमति न होने के कारण पर्यटकों को शाम पांच बजे तक हर हाल में घांघरिया लौटना पड़ता है।
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पर्यटकों को भोजन व अन्य जरूरी सामग्री भी साथ ले जानी पड़ती है। फूलों की घाटी में पांच किमी क्षेत्र तक ही जाने की अनुमति है। घाटी के बीच से पुष्पावती नदी भी बहती है, जिसका साफ पानी पर्यटकों को सम्मोहित करता है।

घाटी में हो रहा इन फूलों का दीदार
प्रिमुला डेंटिकुलाटा, पोटेंटिला एट्रो सेंगुइनिया, रोडोडेंड्रोन कैम्पैन्युलेटम, रोडोडेंड्रोन लेपिडोटम, थाइमस (वन आजवाइन), कोबरा लिली (अरिसेमा), स्नेक लिली, कोरिडालिस काश्मीरियाना, आइरिस कुमाऊंनेनसिस, एलियम ह्यूमाइल, फ्रिटिलेरिया रायली, वायोला बाइफ्लोरा, जैस्मिनम ह्यूमाइल, मार्श मैरीगोल्ड, सिरिंगा इमोडी, थर्मोप्सिस बारबाटा, लिलियम आक्सीपेटलम, एनीमोन रतनजोत व अर्नेबिया बेंथमी।

रास्ता भटककर फूलों की घाटी पहुंचे थे फ्रैंक स्माइथ
घाटी को 1982 में राष्ट्रीय पार्क और 2005 में यूनेस्को की धरोहर घोषित किया गया। घाटी की खोज 1931 में कामेट पर्वतारोहण के लिए गए ब्रिटिश पर्वतारोही वनस्पति शास्त्री फ्रैंक स्माइथ ने की थी। बताते हैं कि कामेट पर्वत से लौटते हुए वह रास्ता भटककर इस घाटी में पहुंच गए।
यहां फूलों के बहुरंगी संसार देख वे इस कदर मोहित हुए कि दोबारा 1937 में घाटी की सैर पर पहुंचे। वतन वापसी के बाद 1938 में ‘वैली आफ फ्लावर’ नामक पुस्तक लिखकर उन्होंने इस अनाम घाटी को देश-दुनिया के सामने रखा।
घाटी के दीदार को शुल्क
- भारतीय : 200 रुपये प्रति प्रति पर्यटक
- भारतीय छात्र और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग : 100 रुपये प्रति पर्यटक
- विदेशी : 800 रुपये प्रति पर्यटक
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने फूलों की घाटी की यात्रा शुरू करने के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने के साथ घाटी में वन कर्मियों की भी तैनाती कर दी है। घांघरिया में पंजीकरण कराने के लिए कार्यालय खोला जा चुका है।
- अभिमन्यु, उप वन संरक्षक, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क
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