चंपावत साइंस सेंटर: CM धामी ने किया निरीक्षण, छात्रों को मिलेगा आधुनिक विज्ञान का लाभ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में 55.52 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अत्याधुनिक साइंस सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों की गु ...और पढ़ें

चंपावत साइंस सेंटर में बाल विज्ञानियों की ओर से निर्मित माडयूलों का निरीक्षण करते सीएम पुष्कर सिंह धामी : जागरण

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जागरण संवाददाता, चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत के भ्रमण के दौरान लगभग 55.52 करोड़ की लागत से बन रहे अत्याधुनिक साइंस सेंटर का निरीक्षण किया।
उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति एवं समयबद्धता का बारीकी से अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
कहा कि यह साइंस सेंटर बनने से यहां के विद्यार्थी विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिक और नवाचार की ओर अग्रसर होंगे।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित वैज्ञानिक गैलरियों एवं चार मंजिला साइंस कैंपस सुविधा का अवलोकन किया।
इस कैंपस में 40 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे यह केंद्र विद्यार्थियों के लिए आवासीय वैज्ञानिक शिक्षण का भी महत्वपूर्ण स्थल बनेगा।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने अवगत कराया कि दो मंजिला साइंस गैलरी ब्लॉक में “फन साइंस गैलरी”, प्रदर्शनी कक्ष, विज्ञान एवं कृषि गैलरी, प्रशिक्षण हॉल तथा अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी गैलरी विकसित की जा रही है।
इसके अतिरिक्त परिसर में 120 क्षमता वाला ऑडिटोरियम, 71 सीटों वाला आधुनिक प्लैनेटेरियम (तारामंडल), जिसमें इनर एवं आउटर डोम की सुविधा होगी तथा स्टाफ के लिए कांफ्रेंस एवं डेवलपमेंट हॉल जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्थाएं भी स्थापित की जा रही हैं।
निरीक्षण के बाद सीएम ने विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विज्ञान मॉडलों का अवलोकन किया तथा नन्हे वैज्ञानिकों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह साइंस सेंटर भविष्य में प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार का प्रमुख केंद्र बनेगा।
उन्होंने कहा कि विज्ञान के बिना विकास की परिकल्पना अधूरी है और इस केंद्र के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों एवं खगोल विज्ञान को समझने का अवसर प्राप्त होगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है।
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