महिला दिवस: हौसलों की ड्राइविंग सीट पर गौरा, बेटे की मौत और पति की बीमारी के बाद उठाया परिवार का जिम्मा
चंपावत की 57 वर्षीय गौरा देवी ने बेटे की मृत्यु और पति की बीमारी के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल काय ...और पढ़ें

टनकपुर में ई-रिक्शा चलाती गौरा देवी : जागरण

समय कम है?
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दीपक सिंह धामी, टनकपुर। चंपावत जिले की बेटियां आज विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम कर रही हैं। गांव से लेकर नगर तक महिलाएं सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में टनकपुर के बोरागोठ क्षेत्र की 57 वर्षीय गौरा देवी भी उन महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं मानी और ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का सहारा बन गईं।
गौरा देवी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। करीब आठ वर्ष पहले उनके बड़े बेटे विनोद राम की कैंसर से मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। बेटे की मौत के बाद उसके दो बच्चों और पत्नी के साथ पूरे परिवार की जिम्मेदारी गौरा देवी पर आ गई। उस समय उनकी उम्र लगभग 49 वर्ष थी। उनके पति कल्लू राम भी रिक्शा चलाते थे, लेकिन अक्सर बीमार रहने के कारण नियमित रूप से काम नहीं कर पाते थे।
बेटे ने जो रिक्शा लोन पर लिया था, उसका कर्ज चुकाना भी परिवार के सामने बड़ी चुनौती बन गया। हालात ऐसे बन गए कि कर्ज चुकाने के लिए घर बेचने की नौबत तक आ गई। ऐसे कठिन समय में गौरा देवी ने साहस और धैर्य के साथ परिवार की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने ई-रिक्शा चलाने का फैसला किया।
शुरुआत में उनके पति ने थोड़ी हिचक दिखाई, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने गौरा देवी को न केवल अनुमति दी बल्कि खुद उन्हें ई-रिक्शा चलाना भी सिखाया। हालांकि, ई-रिक्शा चलाना शुरू करने के करीब दो वर्ष बाद उनके पति का भी निधन हो गया। इसके बावजूद गौरा देवी ने हिम्मत नहीं हारी और अपने परिवार के लिए लगातार मेहनत करती रहीं। आज टनकपुर की सड़कों और गलियों में गौरा देवी का ई-रिक्शा पूरे आत्मविश्वास के साथ दौड़ता नजर आता है। उनके संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी न केवल समाज की रूढ़ियों को तोड़ती है, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुकी है।
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रोजाना कमा रही हैं 600 से 800 रुपये
गौरा देवी ने बताया कि शुरुआत में रोड में उतरने में उन्हें कुछ दिक्कत हुई, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अब वे धड़ल्ले से ई-रिक्शा चलाती हैं। वर्तमान में वे पूर्णागिरि मेले में टनकपुर से पूर्णागिरि के लिए सवारियां ढो रही हैं। बताया कि वे रोजाना ई-रिक्शा चलाकर 600 से 800 रुपये तक कमा लेती हैं। गौरी देवी की जीवटता और हौसले के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं कलाकारों की ओर से सम्मानित किया जा चुका है।