यूपी से डीएलएड कर नौकरी पाने वाले 152 शिक्षकों पर लटकी तलवार, 11 जिलों के टीचरों को विभाग ने भेजे नोटिस
उत्तर प्रदेश से डीएलएड कर उत्तराखंड में प्राथमिक सहायक अध्यापक बने 152 शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
152 शिक्षकों पर फर्जी डीएलएड प्रमाणपत्रों की जांच शुरू।
उत्तर प्रदेश से डीएलएड कर उत्तराखंड में नौकरी पाई।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी कर अभिलेख जांचे।
अशोक केडियाल, देहरादून। उत्तर प्रदेश से डीएलएड कर उत्तराखंड में प्राथमिक सहायक अध्यापक की नौकरी पाने वाले 11 जिलों के 152 शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को नोटिस जारी कर उनके अभिलेखों की जांच शुरू कर दी है। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर अन्य जिलों के शिक्षकों को सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें सर्वाधिक 43 शिक्षक पिथौरागढ़ के हैं।
वर्ष 2024 में विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों में 2906 सहायक अध्यापक पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। भर्ती को उत्तराखंड का स्थायी निवासी और डीएलएड उत्तीर्ण होना अनिवार्य था।
करीब 2400 अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, लेकिन बाद में शिकायतें मिलीं कि कुछ अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश में डीएलएड करने को वहां का फर्जी स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनाया और नौकरी के लिए उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया।
केवल उप्र में थी स्थायी निवास की शर्त
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक केएस रावत के अनुसार वर्ष 2024 में उप्र में डीएलएड में प्रवेश को वहां का स्थायी निवासी होना अनिवार्य था। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी ने तब उत्तराखंड का निवासी होते हुए उप्र से डीएलएड किया है तो उसके प्रमाणपत्र की जांच आवश्यक है।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) स्तर पर अगले सप्ताह संबंधित शिक्षकों के अभिलेखों की जांच और सुनवाई होगी। यदि कोई जांच से असंतुष्ट होगा तो वह प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के समक्ष अपील कर सकेगा। जांच में फर्जीवाड़ा प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अन्य राज्यों से प्राप्त डीएलएड प्रमाणपत्र उत्तराखंड में मान्य हैं।