Indian Military Academy की मुख्यधारा में शामिल हुए 71 कैडेट, एक वर्ष का तक IMA में लेंगे कठोर सैन्य प्रशिक्षण
देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) के ग्रेजुएशन सेरेमनी में आर्मी कैडेट कालेज (एसीसी) विंग के 71 कैडेट शामिल हुए। ...और पढ़ें

भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में भव्य ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित हुई।
जागरण संवाददाता, देहरादून : भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में शुक्रवार को आयोजित भव्य ग्रेजुएशन सेरेमनी में आर्मी कैडेट कालेज (एसीसी) विंग के 71 कैडेट आइएमए की मुख्यधारा में औपचारिक रूप से शामिल हुए।
चेटवुड सभागार में आयोजित इस गरिमामय समारोह में समादेशक लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने कैडेटों को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की स्नातक डिग्रियां प्रदान कर दीक्षित किया। स्नातक डिग्री प्राप्त करने वालों में 30 कैडेट विज्ञान वर्ग और 41 कैडेट ह्यूमेनिटीज वर्ग के रहे।
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डिग्री प्राप्त करने के बाद अब सभी कैडेट आइएमए में बतौर आफिसर कैडेट एक वर्ष का कठोर सैन्य प्रशिक्षण लेंगे, जिसके उपरांत वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगे।

कैडेटों को बधाई देते हुए ले. जनरल सिंह ने कहा कि एसीसी ने देश को बड़ी संख्या में जांबाज, अनुशासित और कुशल अफसर दिए हैं। यह क्षण उनके जीवन की नई यात्रा की शुरुआत है, जिसमें कर्तव्य, अनुशासन और समर्पण उनकी पहचान होंगे।
उन्होंने कहा कि चरित्र, आत्म-अनुशासन, साहस, प्रेरणा, सकारात्मक दृष्टिकोण और पेशेवर दक्षता एक सफल सैन्य अधिकारी के सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को विभिन्न सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए गए।

इससे पूर्व एसीसी के प्रधानाचार्य डा. नवीन कुमार ने कालेज की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि एसीसी के कमांडर ब्रिगेडियर पीयूष खुराना ने सभी कैडेटों और उनके परिवारों को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं।

इन कैडेटों को मिला सम्मान
चीफ आफ आर्मी स्टाफ मेडल
- स्वर्ण पदक : हरि केशर वाग्ले (नेपाल)
- रजत पदक : सागर उप्पल (पंजाब)
- कांस्य पदक : कुलविंदर (हरियाणा)
कमांडेंट सिल्वर मेडल
- सर्विस वर्ग : भव्य चौहान (उत्तर प्रदेश)
- ह्यूमेनिटीज : हरि केशर वाग्ले
- विज्ञान वर्ग : सागर उप्पल
- कमांडेंट बैनर : कारगिल कंपनी
सेना के जांबाज अफसरों की नर्सरी है एसीसी
एसीसी, जिसे भारतीय सेना के सबसे महत्वपूर्ण प्रशिक्षण संस्थानों में से एक माना जाता है, अपने गौरवशाली इतिहास और अनुशासन, नेतृत्व एवं शौर्य की परंपरा के साथ आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
इसकी स्थापना 1929 में मध्य प्रदेश के नौगांव में किचनर कालेज के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य सैनिकों को अधिकारी बनने का अवसर देना था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कालेज बंद हुआ, लेकिन 1960 में इसे नए स्वरूप में आर्मी कैडेट कालेज के रूप में पुनर्जीवित किया गया।
वर्ष 1971 में स्थायी कमीशन के लिए स्नातक डिग्री अनिवार्य होने पर एसीसी को जेएनयू से संबद्ध किया गया। 1974 में पहले बैच को कला स्नातक और 1975 में विज्ञान स्नातक की डिग्री प्रदान की गई। 1977 में कालेज को देहरादून स्थानांतरित कर आइएमए में समाहित कर दिया गया।
जुलाई 2006 में यह पूर्ण रूप से आइएमए की पांचवीं बटालियन (सियाचिन बटालियन) का हिस्सा बन गया। एसीसी से निकलने वाले अनेक अफसरों ने युद्ध और शांतिकाल में अदम्य साहस, वीरता और बलिदान का परिचय देकर देश का मान बढ़ाया है। कई अफसर उच्च सैन्य अलंकरणों से सम्मानित हुए हैं, जो इस संस्थान की उत्कृष्टता को प्रमाणित करते हैं।
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