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    उत्तराखंंड: जादू के पिटारे की खरीद में 11 करोड़ का 'खेल', निदेशालय करेगा जांच

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 09:03 AM (IST)

    उत्तराखंड में प्राथमिक विद्यालयों के लिए 'जादू का पिटारा' उपकरण खरीद में 11.55 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। शिक्षा मंत्री ने निदेशालय ...और पढ़ें

    सांकेतिक तसवीर।

    सांकेतिक तसवीर।

    HighLights

    1. प्राथमिक विद्यालयों में जादू का पिटारा खरीद में गड़बड़ी

    2. समग्र शिक्षा के तहत 11.55 करोड़ रुपये का व्यय

    3. शिक्षा मंत्री ने निदेशालय स्तर पर जांच के आदेश दिए

    अशोक केडियाल, देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग में समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय के लिए 9,977 रुपये की धनराशि से जादू का पिटारा उपकरण खरीदे गए। समग्र शिक्षा ने राज्य की 11,580 प्राथमिक विद्यालयों पर 11 करोड़ 55 लाख, 33 हजार 660 रुपये व्यय किए।

    यह खरीद गड़बड़ी सामने आई, जिसका शिक्षा मंत्री ने कड़ा संज्ञान लिया और मामले की जांच के आदेश दिए। मंत्री ने निर्देशित किया है कि निदेशालय स्तर पर एक कमेटी गठित कर मामले की जांच होगी। अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों पर कार्रवाई होगी।

    प्रत्येक प्राइमरी स्कूल को 9,977 रुपये में खरीदा एक जादू का पिटारा

    सभी 13 जनपदों को समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत ‘जादू का पिटारा’ मद के लिए उपलब्ध कराई गई करीब 90 लाख रुपये से अधिक की धनराशि के व्यय में अनियमितता सामने आई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विभागीय कार्मिकों और संबंधित फर्मों की मिलीभगत से निविदा प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां बरती गईं।

    11,580 प्राथमिक विद्यालयों पर समग्र शिक्षा ने व्यय किए 11.55 करोड़

    निविदाएं आमंत्रित किए जाने के बावजूद स्वीकृत बजट के बराबर राशि वाली निविदाओं को ही मंजूरी दी गई, जिससे प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया प्रभावित हुई और वित्तीय अनियमितता की आशंका बढ़ी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक केएस रावत ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है और जिम्मेदार अधिकारियों व फर्मों की भूमिका तय करने को लेकर निर्देशित किया है।

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    क्या है जादू का पिटारा

    समग्र शिक्षा के तहत जादू का पिटारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीईआरटी की पहल है। इसका उद्देश्य तीन से आठ वर्ष तक के बच्चों (बालवाटिका से कक्षा-दो) को खेल व गतिविधि-आधारित आनंद दायक तरीके से सीखने का अवसर देना है।

    पिटारे में बच्चों के लिए चित्र और फ्लैश कार्ड, कहानी की पुस्तकें, पहेलियां और पजल, ब्लॉक, खिलौने, गणितीय सामग्री, अक्षर एवं संख्या कार्ड, स्थानीय भाषा और संस्कृति पर आधारित गतिविधियां, शिक्षक के लिए गतिविधि पुस्तिका होती हैं। इसके लिए प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय को 9977 रुपये दिए जाते हैं।

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    ‘विभागीय बैठक में जादू का पिटारा उपकरणों में सामने आई गड़बड़ी की जांच के आदेश दिए गए हैं। निदेशालय स्तर पर जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट शासन को देगी।’

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    डॉ. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री