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    बच्चों को फोन और ऑनलाइन गेम की लत बना रही 'मेंटल', पेरेंट्स के काम आएगी डॉक्टर की बताई ये सलाह

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 10:34 AM (IST)

    गाजियाबाद में ऑनलाइन गेम की लत से तीन बहनों की मौत की घटना ने बच्चों में फोन और ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत पर चिंता बढ़ा दी है। यह लत बच्चों के मानसिक विक ...और पढ़ें

    अधिक स्क्रीन टाइम और आनलाइन गेमिंग की लत मानसिक विकास को भी कर रही प्रभावित। Concept Photo

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, देहरादून। तकनीक ने जहां बच्चों के लिए सीखने नये रास्ते खोले, वहीं हद से ज्यादा इस्तेमाल ने मुसीबत भी पैदा कर दी है। बच्चे किताबों की खुशबू, खेल मैदान व पार्कों में मस्ती और दोस्तों के साथ समय बिताने की जगह मोबाइल की स्क्रीन में खोते जा रहे हैं। इसमें आनलाइन गेम की लत उन्हें मानसिक रूप से बीमार बना रही है।

    गाजियाबाद में कोरियाई लवर आनलाइन गेम की लत में तीन मासूम बहनों की जान देने की घटना ने अभिभावक से लेकर काउंसलर और बच्चों के सामने कहीं न कहीं प्रश्न उठा दिया है।

    काउंसलर भी इस बात को मानते हैं कि बच्चों में अधिक स्क्रीन टाइम और आनलाइन गेमिंग की लत उनके मानसिक विकास को प्रभावित कर रही है। जो उनके चिड़चिड़ापन मानसिक असंतुलन और जिद्दी के रूप में नजर आ रहा है। बच्चों की एकाग्रता कम हो रही है और गुस्सा भी जल्दी फूट रहा है। बच्चे मोबाइल पाने के लिए बैचेन रहते हैं, रोते हैं और आक्रामक तक हो जा रहे हैं।

    आनलाइन गेम्स की लत बच्चों में बढ़ रही है, क्योंकि अभिभावक यह नहीं समझ रहे हैं कि उनकी असली संपत्ति उनके बच्चे हैं। अभिभावक का बच्चों से दूर होना और समय-समय पर नजर न रखना, बच्चों को मानसिक रूप से कमजोर बना देती है। बच्चों के पहले काउंसलर उसके माता-पिता होते हैं। माता-पिता की दूरियां ही बच्चों को गेम व इंटरनेट मीडिया और अन्य अनैतिक तत्वों की तरफ ले जा रही हैं। - डा. मुकुल शर्मा, अध्यक्ष इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ साइकोमेट्रिक काउंसलिंग


    बच्चे स्कूल नहीं जा रहे, उनका कोई लक्ष्य नहीं है अथवा दोस्तों से मिलना व खेलना नहीं चाहते। ऐसे बच्चे आइसोलेट और अकेले रहते है और घर में उन्हें इमोशनल डाइट मोबाइल से ही मिलती है। आनलाइन मोबाइल गेम में स्टेप टू स्टेप जाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें पता नहीं चलता कि मोबाइल के बाहर भी कुछ हो रहा होगा। यह नुकसानदायक स्थिति बन जाती है।
    - डा. सोना कौशल गुप्ता, न्यूरो साइकोलोजिस्ट व सीबीएसई काउंसलर

    इन बातों का रखें ध्यान

    • बच्चों के सामने मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें। दो से तीन वर्ष के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें।
    • माता-पिता की जिम्मेदारी है कि बच्चों के सामने दोस्त की तरह पेश आएं, ताकि उनके मन में भय न रहे।
    • बच्चों को संस्कार सभ्यता और संस्कृति से बांधें, जिससे हम उनकी भविष्य की बागडोर को बांध सकें।
    • माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी है कि बच्चों को समाज के लिए तैयार करें, यह तभी हो पाएगा जब उन्हें समय देंगे।
    • बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है। ध्यान दें कि बच्चा कितनी देर मोबाइल देख रहा और क्या देख रहा है।