हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक पर एआई से रुकेगी हाथियों की मौत, लोको पायलट को पहले ही मिल जाएगा अलर्ट
राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रैक पर अब हाथियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) लगाया जा ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
राजाजी टाइगर रिजर्व में हाथियों की सुरक्षा हेतु एआई तकनीक।
रेलवे ट्रैक के 22.5 किमी हिस्से में लगेगा आईडीएस।
हाथियों की मौजूदगी पर लोको पायलट को मिलेगा अलर्ट।
केदार दत्त, देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले हरिद्वार-देहरादून रेलवे ट्रेक पर अब हाथियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित तकनीक का सहारा लिया जाएगा। असोम, बंगाल के बाद रेलवे अब उत्तराखंड में यह पहल करने जा रहा है।
इस रेलवे टेक के 22.5 किलोमीटर हिस्से में इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से जंगल में ट्रेक के आसपास हाथियों की मौजूदगी की पता चलते ही लोको पायलट के केबन में लगे टेबलेट पर पहले ही अलर्ट मिल जाएगा।
इसके बाद वह तुरंत ट्रेन की रफ्तार कम कर देगा और जरूरत पड़ने पर उसे रोक भी लेगा। इससे हाथियों के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा। साथ ही इससे यात्रियों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
संवेदनशील है रेलवे ट्रैक
51 किलोमीटर लंबे देहरादून-हरिद्वार रेलवे ट्रेक का कांसरो से हरिद्वार तक 22.5 किलोमीटर हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व में है। इसके अंतर्गत हरिद्वार, मोतीचूर व कांसरो रेंज के जंगल में वर्ष 2010 से अब तक आठ हाथियों की ट्रेन से टकराकर मौत हाे चुकी है। यही कारण है कि इस ट्रेक को वन्यजीवों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
खबरें और भी
ऐसे काम करता है आईडीएस
आईडीएस के तहत रेलवे ट्रेक के समानांतर एक मीटर गहराई में ओएफसी (आप्टिकल फाइबर केबल) बिछाई जाएगी। इसके साथ एआई आधारित विशेष सेंसर भी लगेंगे।
जब कोई हाथी या अन्य बड़ा वन्यजीव रेलवे ट्रेक के दोनों ओर लगभग 100 मीटर के दायरे में आएगा तो उसके कदमों से जमीन में होने वाली कंपन को सेंसर तुरंत पहचान लेगा। एआई इन संकेतों का विश्लेषण कर कुछ ही सेकंड में लोको पायलट के टेबलेट पर अलर्ट भेज देगा। इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसके लिए पेड़ काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मोतीचूर में हो चुका ट्रायल
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे के अनुसार इस ट्रेक पर ऐसे 38 स्थान हैं, जहां से हाथियों की आवाजाही होती है। पिछले वर्ष मोतीचूर में आईडीएस का सफल ट्रायल किया गया था। अब राज्य वन्यजीव बोर्ड से इसका प्रस्ताव अनुमोदित कराकर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड को भेजा जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलते ही रेलवे द्वारा जेएमवी कंपनी के माध्यम से यह सिस्टम स्थापित किया जाएगा।
निर्धारित है गति सीमा
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने वर्ष 2015 में इस ट्रेक के राजाजी टाइगर रिजर्व के हिस्से के लिए ट्रेन की गति सीमा निर्धारित की। वहां दिन में 40 किमी और रात्रि में 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तय की गई है।