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    मुद्दों के बियाबान में उपलब्धियों का डंका

    Updated: Sun, 08 Mar 2026 12:17 AM (IST)

    भाजपार्टी के बारे में यह कहा जाता है कि वह साल के 365 दिन चुनावी मोड में रहती है। ...और पढ़ें

    मुद्दों के बियाबान में उपलब्धियों का डंका

    मुद्दों के बियाबान में उपलब्धियों का डंका

    HighLights

    1. अमित शाह ने उत्तराखंड में भाजपा की चुनावी रणनीति तय की

    2. धामी सरकार के यूसीसी, लैंड जिहाद फैसलों की सराहना की

    3. कांग्रेस को मुद्दों के अभाव और संगठनात्मक कमजोरी पर घेरा

    मनोज झा, राज्य संपादक, उत्तराखंड। भारतीय जनता पार्टी के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वह 365 दिन चुनावी मोड में रहती है। चाहे बूथ प्रबंधन हो या प्रतिपक्ष को लेकर चुनावी व्यूह रचना या फिर चुनावी मुद्दे या नैरेटिव सेट करने की बात, आमतौर पर बाकी दल जहां अधिसूचना जारी होने के बाद अपने अभियान को गति देते दिखाई देते हैं, वहीं भाजपा अपनी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने लगती है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आज के दौरे में यह बात शीशे की तरह साफ-साफ दिखाई भी पड़ी। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी लगभग साल भर का समय शेष है, लेकिन आज शाह की गर्जना से ऐसा लग रहा था, मानो वह किसी चुनावी सभा को संबोधित कर रहे हों।

    शाह चुनाव के भावी मुद्दे दे गए और नारे भी लगा गए। सभा स्थल पर उमड़ी भीड़ ने यह भी बताया कि सांगठनिक तैयारियों की दृष्टि से भाजपा चुनाव के लिए अभी से कमर कस चुकी है।

    ऐसे तो हरिद्वार में आज का कार्यक्रम प्रदेश की धामी सरकार की चार साल की उपलब्धियों के प्रदर्शन को लेकर था, लेकिन शाह के तेवर विशुद्ध रूप से चुनावी थे।

    उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया, उनसे यह साफ हो गया कि प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हीं के इर्द-गिर्द कांग्रेस की घेराबंदी करेगी।

    उन्होंने यूसीसी, मतांतरण विरोधी कानून, लैंड जिहाद, घुसपैठ जैसे मुद्दों पर धामी सरकार के कठोर फैसलों की न सिर्फ प्रशंसा की, बल्कि यह भी बताया कि कांग्रेस राज के बदहाल और उपेक्षित उत्तराखंड को भाजपा ने अपनी सरकारों के दौरान किस तरह सजाया और संवारा है।

    प्रदेश में नकल रोधी कानून को लेकर बीच-बीच होने वाली कांग्रेस की आलोचना का जवाब उन्होंने पुलिस विभाग में 1900 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपकर दिया। साथ ही कांग्रेस पर हमला बोला कि उसके राज में सरकारी नौकरियां पर्ची और खर्ची से मिलती थी।

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    दूसरी ओर, धामी सरकार के नकल रोधी कानून ने सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया, बल्कि आज प्रतिभाशाली आमलोगों को भी सहजता से नौकरियां भी मिल रही हैं।

    मुद्दे तय करने के क्रम में शाह ने लैंड जिहाद के खिलाफ धामी सरकार के रुख-रवैये की भी प्रकारांतर से प्रशंसा की।

    कहा कि प्रदेश में दस हजार अतिक्रमण को मटियामेट किया जा चुका है। इसी प्रकर प्रदेश में तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर भी वह चिंतित दिखे। वह गरजे कि घुसपैठियों को केदारनाथ से कन्याकुमारी तक खदेड़ेंगे।

    उन्होंने यह भी संकेत दे दिया कि चुनावी मैदान में कांग्रेस को भ्रष्टाचार के मोर्चे पर भी जवाब देना होगा। इस क्रम में उन्होंने विगत की कांग्रेसी सरकारों के कई घपले-घोटालों का उल्लेख भी किया।

    साथ ही ताल ठोंकने के अंदाज में कहा कि धामी सरकार के दामन पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं है। शाह ने यह संदेश भी देने का प्रयास किया कि कांग्रेस की सरकारों में देवभूमि में विकास का पहिया किस तरह थम गया था, जबकि सत्ता में भाजपा के आने के बाद न सिर्फ विकास ने गति पकड़ी, बल्कि आज समर्थ और शक्तिमान उत्तराखंड कइयों के लिए उदाहरण बन रहा है।

    भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले इस दिग्गज नेता ने आज एक प्रकार से पार्टी संगठन की तैयारियों का भी जायजा लिया। पार्टी के पदाधिकारी और नेतागण इस परीक्षा में सफल भी रहे।

    प्रदेश के दूरस्थ इलाकों से जिस तरह लोग बीती रात से ही हरिद्वार में जुटने लगे थे, उससे यह स्पष्ट है कि चुनावी तैयारियों के लिहाज से भाजपा ने अपने कील-कांटे दुरुस्त कर लिए हैं।

    शायद भीड़ का जोश देखकर ही शाह ने प्रदेश में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार के नारे को गुंजायमान भी किया। बाद में पार्टी की कोर कमेटी के साथ-साथ बूथ प्रबंधन से जुड़ी टोलियों के साथ एक बैठक में उन्होंने चुनावी मंत्र भी दिए।

    अमित शाह की सभा में भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के उलट यदि कांग्रेस की तैयारियों को देखें तो वह अभी पीछे दिखाई देती है।

    प्रदेश अध्यक्ष के पद पर गणेश गोदियाल की ताजपोशी को पांच महीने बीतने को हैं, लेकिन पार्टी अभी तक अपनी प्रांतीय कार्यकारिणी गठित करने को लेकर ही असमंजस में है। स्पष्ट है कि बड़े नेताओं के स्वार्थ, अहम और गुटबाजी के चलते अभी तक कोई सर्वमान्य फार्मूला नहीं निकल पाया है।

    दूसरी ओर, भाजपा की प्रायः सभी कमेटियां गठित हो चुकी हैं और वे मैदान में सक्रिय भी हैं। एकाध अवसरों को छोड़ दें तो कांग्रेस एकजुट होकर कोई बड़ा शक्ति प्रदर्शन भी नहीं कर पाई है।

    कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा को अपवाद मान लें तो पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का कोई भी बड़ा नाम लंबे समय से उत्तराखंड से दूर है। दूसरी ओर, अमित शाह का गत दो माह के अंतराल में यह दूसरा दौरा था।

    शाह पिछले साल जुलाई में भी आए थे, जबकि राज्य स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी गत नवंबर में प्रदेश का दौरा कर चुके हैं। इनके अलावा तमाम केंद्रीय मंत्रियों के भी दौरे हुए हैं।

    जहां तक किसी नैरेटिव या मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार की घेराबंदी का प्रश्न है तो कांग्रेस इसमें भी कोई बहुत सफल नहीं हो पाई है।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर थोड़ा हो-हल्ला मचाया भी गया, लेकिन सरकार ने मामले की सीबीआइ जांच के आदेश देकर मानो उसकी भी हवा निकाल दी।

    साथ ही यह संदेश देने का प्रयास भी किया कि इस मामले में उसके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसे तो चुनाव में अभी समय है, लेकिन विपक्षी कांग्रेस जहां मुद्दों के बियाबान में दिखाई देती है, वहीं सत्तारूढ़ खेमा अपनी उपलब्धियों को ही चुनावी मुद्दा बनाने में सफल होता दिखाई दे रहा है।

    फिलहाल भाजपा का पलड़ा भारी दिख रहा है और अमित शाह इस पलड़े पर आज कई और वजनी मुद्दे रखकर चले गए हैं। देखना होगा कि दूसरे पलड़े पर कांग्रेस कौन-सा वजनी मुद्दा रखकर चुनावी मैदान में उतरती है।