आशा भोसले ने गढ़वाली गीत गाकर उत्तराखंड सिनेमा को दिया अलग रंग, बदरीनाथ का नाम सुनते ही हो गईं थी तैयार
आशा भोसले के निधन से उत्तराखंड के संगीत प्रेमी स्तब्ध हैं। उन्होंने गढ़वाली फिल्म 'जन्मों कू साथ' में 'जन्मों कू साथ छे यू किले गै तोड़ी' गीत गाकर जान ...और पढ़ें

HighLights
आशा भोसले के निधन से उत्तराखंड के संगीत प्रेमी स्तब्ध।
गढ़वाली फिल्म 'जन्मों कू साथ' में गाया यादगार गीत।
बदरीनाथ का नाम सुनकर गाने को तुरंत तैयार हुईं आशा जी।
जागरण संवाददाता, देहरादून। बालीवुड में हिंदी गीतों के साथ कई भाषाओं के हजारों गीतों में सुरों का जादू बिखेरने वाली आशा भोसले के निधन से उत्तराखंड के संगीत प्रेमी व रंगकर्मी भी स्तब्ध हैं।
गढ़वाली फिल्म 'जन्मों कू साथ' में आशा भोसले ने जन्मों कू साथ छे यू किले गै तोड़ी...गीत गाकर फिल्म में जान डाल दी थी। इस फिल्म को पहले ग्वेर छ्वारा नाम दिया गया था। इस गीत के लिए जब उत्तराखंड से टीम उनसे मिलने गई तो आशा ने पूछा कहां से हो तो बदरीनाथ का नाम सुनते ही वह गाने के लिए तैयार हो गई और आधा घंटे में रिकार्डिंग पूरी की।
फिल्म प्रोड्सूसर बंसत घिल्डियाल बताते हैं कि वर्ष 1989 में फिल्म बनाने का मन था। सोचा आशा भोसले, सुरेश वाडेकर और सुषमा श्रेष्ठ से मुलाकात की जाए। म्यूजिक डायरेक्टर कैलाश थलेडी के साथ जब वे आशा भोसले से मुंबई स्थित उनके घर प्रभुकुंज गए तो उनका पहला सवाल था कि कहां से आए हो।
चूंकि कोटद्वार और देहरादून को इतना कोई जनता नहीं था तो इसलिए हमने कहा कि बदरीनाथ से आए हैं और इच्छा है कि आप हमारे इस फिल्म में गीत गाएं। जब गीत की बात आई तो उन्होंने यह भी बताया कि वैसे तो मैं कई भाषा में गा चुकी हूं लेकिन गढ़वाली गाने का पहले मुझे अर्थ जानना है।
इसके बाद उन्हें अर्थ समझाया कि यह सेड सांग है तो उन्होंने इसी अंदाज में बेहतर ढंग से गाया और आधा घंटे में रिकार्डिंग कराकर चली गई। जब पैसे की बात आई तो उन्होंने बताया कि हिंदी फिल्मों के लिए मैं 50 हजार प्रति गाना लेती हूं ऐसा करो आप 25 हजार दे देना।
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बंसत घिल्डियाल बताते हैं कि पहले इस फिल्म को वह खुद बनाना चाहते थे इसलिए इसका नाम भी 'ग्वेर छ्वारा' रखा गया लेकिन बाद में टी-सीरीज के साथ फिल्म बनाई तो इसका नाम बदलकर 'जन्मों कू साथ' रखा। इस फिल्म का निर्देशक आशु चौहान ने किया है।
पुतर कि करता और कहां का है?
फिल्म निर्देशक अनुज जोशी ने बताया कि वर्ष 1995-2000 तक उनकी मुंबई में कई बार आशा भोसले से मुलाकात हुई। पहली बार जब मिली तो कहा कि पुतर कि करता और कहां का है। मैने कहा कि बदरीनाथ का तो वह मुस्करा देती थी। वर्ष 2018 में दिल्ली से मुंबई फ्लाइट के दौरान उनसे अंतिम बार मुलाकात हुई थी। उनका इस दुनिया से जाना दुखदाई है।