उत्तराखंड में यहां मौजूद है अश्वमेध यज्ञ स्थल, खोदाई के दौरान मिले मिट्टी के बर्तन व ईंटें
उत्तराखंड के कालसी स्थित जगतग्राम बाढ़वाला में अश्वमेध यज्ञ स्थल पर 73 साल बाद फिर से खुदाई शुरू हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग चौथी वेदिका क ...और पढ़ें

खोदाई के दौरान भी मिट्टी के बर्तनों के अवशेषों के साथ की ईंटों के भी अवशेष मिले। जागरण
HighLights
कालसी अश्वमेध यज्ञ स्थल पर 73 साल बाद खुदाई
चौथी वेदिका की तलाश में पुरातत्व विभाग सक्रिय
खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तन, कोयले और ईंटें
संवाद सूत्र, कालसी। चकराता के कालसी में जगतग्राम बाढ़वाला स्थित अश्वमेध यज्ञ स्थल में यज्ञ के दौरान चार वेदिकाओं का वर्णन मिलने पर वहां पहले से तीन वेदिकाएं स्थापित हैं। चौथी वेदिका के महत्व को देखते हुए उसकी खोज करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक अश्वमेध यज्ञ स्थल में 73 वर्ष बाद दोबारा खोदाई का कार्य शुरू किया गया। इस दौरान एक मीटर से नीचे की परतों में मिट्टी के बर्तनों के अवशेष व जले हुए कोयले के अवशेष मिले हैं। गुरुवार को खोदाई के दौरान भी मिट्टी के बर्तनों के अवशेषों के साथ की ईंटों के भी अवशेष मिले।
खोदाई का मुख्य उद्देश्य राजा शीलबर्मन की ओर से कराए गए चार अश्वमेध यज्ञ स्थलों की चौथी वेदिका को ढूंढना है, जिससे ऐतिहासिक स्थल का वैज्ञानिक व वास्तविक कालक्रम के बारे में पता लगाया जा सके। कालसी गेट स्थित अशोक शिलालेख के निकट बाढ़वाला के जगतग्राम में स्थित तीसरी शताब्दी ईस्वी में कुणिंद शासक राजा शीलबर्मन की ओर कराए गए अश्वमेध यज्ञ स्थल की खोज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से वर्ष 1953 से 54 में की गई खोदाई के दौरान हुई थी।
जानकारी के अनुसार राजा शीलबर्मन ने चार अश्वमेध यज्ञ स्थल बनवाए थे। उस दौरान तीन यज्ञ वेदिकाएं मिल गई थीं, जो वर्तमान पुरातात्विक महत्व का संरक्षित स्थल है। इस स्थल को भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक का भी दर्जा दिया है। चौथी वेदिका की खोज में एक दिसंबर 2025 से जगतग्राम में खोदाई का कार्य शुरू किया गया है, जो अभी चल रहा है।
प्रारंभिक चरण में यज्ञ स्थल पर मिट्टी के बर्तनों के कुछ अवशेष, जले हुए कोयले मिले हैं। इसके साथ ही गुरुवार को मिट्टी के बर्तनों के साथ ईंटों के टुकड़े भी मिले हैं। जिसका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इनका परीक्षण कराने जा रहा है। इस संबंध में सहायक पुरातत्वविद पीएस राणा ने बताया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इस स्थान पर चौथी वेदीका का पता लगाने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा खोदाई की जा रही है।