ब्रिगेडियर मुकेश जोशी ने 32 साल तक की देश सेवा, देहरादून में फायरिंग की चपेट में आने से हुई मौत
देहरादून में सुबह की सैर के दौरान रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की गोली लगने से मौत हो गई। दो तेज रफ्तार वाहनों के बीच चल रही फायरिंग की चपेट में आने ...और पढ़ें

मृतक ब्रिगेडियर एमके जोशी का फाइल फोटो। साभार स्वजन

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जागरण संवाददाता, देहरादून। भारतीय सेना में 32 साल नौकरी करने के बाद रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी पत्नी के साथ जोहड़ी स्थित तुला अपार्टमेंट में रहकर खुशहाल जीवन जी रहे थे।
वह तुला अपार्टमेंट सोसायटी के अध्यक्ष भी थे और नियमित सुबह 6:30 पर साथियों के साथ मार्निंग वाक के लिए निकलते थे।
सोमवार को भी वह अपने दो साथियों के साथ मार्निंग वाक पर निकले थे। रास्ते में दो पक्षों के बीच चल रहे झगड़े में उनकी जान चली गई। इस घटना से क्षेत्र में गमगीन माहौल बना हुआ है।
स्वजन के अनुसार मुकेश जोशी वर्ष 2010 में ब्रिगेडियर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वह भारतीय सेना की इंटेलिजेंस कोर में रहे और कई वर्ष जम्मू कश्मीर में सेवाएं दी।
उनका बेटा भारतीय नौ सेना में कमांडर पद पर तैनात हैं, जिनकी ड्यूटी इस समय मारिशस में है। वहीं उनकी बेटी गोवा में पत्रकार हैं, जो कि इन दिनों माता-पिता के पास आई हुई हैं।
इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। घटना के संबंध में उनके बेटे को भी सूचित किया गया है, जो कि मंगलवार को देहरादून पहुंचेंगे।
रिटायर्ड ब्रिगेडियर की हत्या के मामले में चश्मदीदों ने बताया कि घटना से कुछ मिनट पहले ही मुकेश जोशी हमारे साथ मार्निंग वाक कर रहे थे।
इसके कुछ देर बाद स्कार्पियो सवार युवकों ने फार्च्यूनर को रोकने के लिए उसके टायरों पर फायरिंग शुरू कर दी। इसी दौरान एक गोली वहां से गुजर रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के सीने में लग गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
गोली की रफ्तार से भाग रहे थे दोनों वाहन
घटना के समय रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे तुला ग्रीन अपार्टमेंट सोसायटी के सचिव एसपी शर्मा ने बताया कि 10 साल से वह मार्निंग वाक पर जाते हैं। सोमवार सुबह भी करीब 6:30 बजे वह मार्निंग वाक के लिए निकले थे।
वह मालसी की तरफ जा रहे थे और घर से निकले मुश्किल से 08 मिनट ही हुए होंगे। मालसी सिनोला प्राथमिक विद्यालय के पास मेन रोड पर वह सड़क के किनारे चल रहे थे।
तभी उन्होंने देखा कि दूर से दो वाहन बेहद तेज रफ्तार में आ रही हैं। उनकी रफ्तार करीब 140 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी।
पहले लगा कि हार्ट अटैक आया है, लेकिन सीने में सुराख था
सचिव एसपी शर्मा ने बताया कि वह खतरा भांपकर उन्होंने ब्रिगेडियर साहब और अन्य साथियों को थोड़ा साइड करने की कोशिश की, ताकि वह वाहनों की चपेट में न आ जाएं। तभी दो आवाजें आईं।
शुरू में लगा कि किसी ने पटाखे फोड़े हैं, लेकिन अगले ही पल उनके साथ चल रहे ब्रिगेडियर जोशी सड़क पर गिर पड़े।
उनके दाहिने सीने में एक साफ सुराख हो गया था और तेजी से खून बह रहा था। जब तक वह कुछ समझ पाते, महज 4 से 5 सेकंड के अंदर दोनों गाड़ियां हवा की तरह वहां से ओझल हो गई।
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बेटी बेसुध, मारिशस से आ रहा है बेटा
एसपी शर्मा ने बताया कि रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी का एक बेटा है, जो भारतीय नौसेना में कमांडर के पद पर तैनात है। वर्तमान में उसकी तैनाती प्रतिनियुक्ति पर मारिशस में है।
उनकी 45 वर्षीय बेटी गोवा में पत्रकार है। हादसे के बाद से उनकी पत्नी व बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटा मारिशस से भारत के लिए रवाना हो गया है, जिसे देहरादून पहुंचने में कल शाम तक का समय लग सकता है।
इस कारण अंतिम संस्कार संभवतः बुधवार सुबह किया जाएगा। भावुक होकर उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर जोशी बहुत ही मिलनसार और सभ्य लोग थे, पूरे अपार्टमेंट में हर कोई उन्हें सम्मान देता था।
सनरूफ से बाहर निकलकर लगातार फायरिंग कर रहा था व्यक्ति
स्थानीय पार्षद सागर लामा व पड़ोसी युवक शेखर ने बताया कि वह रोज की तरह सुबह करीब 6:30 बजे बच्चों के साथ मार्निंग वाक पर निकला था। वहां रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी और दो अन्य लोग भी थे।
हालांकि वह उन दो साथियों को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता, लेकिन ब्रिगेडियर जोशी रोज वहां मार्निंग वाक के लिए आते थे। तभी करीब 30 फीट की दूरी पर अचानक हलचल दिखी और वह दौड़कर वहां पहुंचा। उनके साथियों ने बदहवास होकर बताया कि उन्हें गोली लग गई है।
आसपास मौजूद लोगों से पता चला कि दो वाहन एक सफेद फार्च्यूनर और एक काली स्कार्पियो वहां से गुजरी थीं और उनके बीच चलती सड़क पर फायरिंग हो रही थी। एक व्यक्ति सनरूफ से बाहर निकलकर फायरिंग कर रहा था।
गार्ड बोला, साहब नेकदिल और जमीन से जुड़े इंसान थे
तुला ग्रीन अपार्टमेंट के गेट पर पिछले 8-9 सालों से तैनात गार्ड जगदीश प्रसाद ने कहा कि उनके लिए ब्रिगेडियर मुकेश जोशी अपार्टमेंट के अध्यक्ष ही नहीं ब्लकि एक अभिभावक की तरह थे। जब वह गोवा घूमने जाते तो वहां से भी फोन कर हाल पूछते थे।