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    चकराता का टाइगर फाल: एक साल बाद भी पेड़ हटाए नहीं, पर्यटकों की जान को खतरा

    Updated: Mon, 11 May 2026 06:01 AM (IST)

    चकराता के टाइगर फाल में खतरनाक पेड़ों को एक साल बाद भी नहीं हटाया गया है, जिससे पर्यटकों की जान को खतरा बना हुआ है। ...और पढ़ें

    टाइगर फाल में मस्ती करते पर्यटक।

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    संवाद सूत्र, चकराता (देहरादून)। टाइगर फाल में खतरा बने पांच पेड़ों को हटाया नहीं जा रहा है। इससे पर्यटकों के साथ हादसे की आशंका बनी हुई है।

    यहां गत वर्ष 26 मई को झरने से पेड़ गिरने से चकराता के सुजऊ गांव निवासी गीताराम जोशी (48) व दिल्ली की पर्यटक अलका आनंद (55) की मौत हो गई थी। इसके बावजूद बिना सुरक्षा मानकों के ही टाइगर फाल पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है।

    वीकेंड पर चकराता का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल टाइगर फाल पर्यटकों से गुलजार रहता है। यहां स्थानीय के साथ ही अन्य राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं।

    बीते वर्ष मई में हादसे के बाद टाइगर फाल झरने में स्नान गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी। दो जून 2025 को तहसील प्रशासन, पर्यटन विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम ने टाइगर फाल क्षेत्र का निरीक्षण किया था।

    निरीक्षण के दौरान झरने के ऊपरी हिस्से में 17 पेड़ों को असुरक्षित श्रेणी में पाया गया था। इसके बाद डीएफओ वैभव सिंह ने खतरा बने पेड़ों के कटान के लिए वन निगम को पत्र भेजा, लेकिन अब तक खतरनाक पेड़ों का कटान नहीं हो पाया है।

    जानकारी के अनुसार वन विभाग ने फिलहाल पांच पेड़ों के कटान की अनुमति दी है। क्षेत्रीय टाइगर फाल विकास निगरानी समिति अध्यक्ष अर्जुन सिंह का कहना है कि प्रशासन को खतरा बने पेड़ों को जल्द कटवाना चाहिए, ताकि पर्यटक सुरक्षित रहें।

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