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देहरादून: चकराता में उफनते नाले पर पेड़ डालकर बनाया पुल, ग्रामीण जान जोखिम में डाल मंडी पहुंचा रहे सेब-टमाटर

Published: Tue, 14 Jul 2026 07:21 PM (GMT+05:30)

देहरादून के चकराता में शिलगांव खत के ग्रामीणों ने नखारी खड्ड पर पेड़ काटकर अस्थायी पुल बनाया है, क्योंकि मानसून ...और पढ़ें

HighLights

  1. ग्रामीणों ने नखारी खड्ड पर पेड़ से बनाया अस्थायी पुल

  2. किसान जान जोखिम में डालकर मंडी पहुंचा रहे फसल

  3. प्रशासन से पुलिया निर्माण की मांग, अनदेखी से रोष

चंदराम राजगुरु, त्यूणी (देहरादून)। उत्तराखंड के पर्वतीय और दुर्गम इलाकों में बुनियादी संसाधनों व सुविधाओं की कमी आज भी किसानों की नियति बनी हुई है।

खासकर मानसून सीजन में बरसाती खड्ड और नाले उफान पर आने से ग्रामीण किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं।

विकासखंड चकराता के सीमांत शिलगांव खत से जुड़े छजाड़-हरटाड़ के ग्रामीणों ने नखारी खड्ड को पार करने के लिए स्वयं के प्रयासों से एक पेड़ काटकर वैकल्पिक पुल तैयार किया है।

लंबे समय से पुलिया निर्माण की मांग कर रहे इन ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई नहीं है और किसान जान हथेली पर रखकर अपनी उपज मुख्य मार्ग तक पहुंचा रहे हैं।

90 परिवारों की आर्थिकी संकट में

खेड़ा नखारी और भटाड़ क्षेत्र स्थानीय किसानों की आर्थिकी का मुख्य जरिया है, लेकिन एक अदद पुल न होने से सब बेमानी साबित हो रहा है।

  • सैकड़ों बीघा उपजाऊ भूमि: शिलगांव खत के छजाड़ व हरटाड़ और लखौ खत से जुड़े सारनी-किस्तुड पंचायत के करीब 90 ग्रामीण परिवारों की कृषि भूमि और सेब के बगीचे इसी खड्ड के दूसरे छोर पर स्थित हैं।
  • मुख्य मार्ग से दूरी: दारागाड़-कथियान मुख्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर दूर नखारी खड्ड को पार करके ही किसानों को अपने खेतों तक जाना पड़ता है।
  • नकदी फसलों का गढ़: इस क्षेत्र में सीजन के दौरान भारी मात्रा में टमाटर, आलू, गागली (अरबी) जैसी नकदी फसलों के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले सेब का उत्पादन होता है।

तार का जुगाड़ टूटा तो बनाया पेड़ का पुल

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों स्याणा जयेंद्र चौहान, स्याणा संतराम चौहान, रमेश चौहान, रणवीर सिंह और केशर सिंह ने अपनी आपबीती साझा की।

  • पहले लोहे की तार से था जुगाड़: कुछ समय पहले तक ग्रामीणों ने खड्ड के आर-पार लोहे की मोटी तार बांधकर अपनी फसल को जैसे-तैसे मुख्य मार्ग तक पहुंचाने की व्यवस्था की थी। लेकिन हाल ही में वह तार भी टूट गई।
  • अब पेड़ का सहारा: कोई अन्य विकल्प न बचता देख इस मानसून सीजन में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से एक भारी पेड़ को उफनते नाले के आर-पार डालकर वैकल्पिक पुल बनाया है। पानी के तेज बहाव के बीच इस संकरे पेड़ के ऊपर संतुलन बनाकर भारी बोझ लेकर गुजरना सीधे तौर पर जान को खतरे में डालना है, लेकिन आर्थिकी बचाने के लिए किसान मजबूर हैं।

सुनवाई न होने से ग्रामीणों में रोष

सतपाल, केदार सिंह, विजयपाल और भरत सिंह समेत अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से इस मुसीबत को झेल रहे हैं। स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन और सरकार से नखारी खड्ड पर एक अदद छोटी पुलिया निर्माण की गुहार कई बार लगाई जा चुकी है, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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