देहरादून: चालदा महासू महाराज की प्रवास यात्रा, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
श्री चालदा महासू महाराज की दोहा से कचटा मंदिर तक की प्रवास यात्रा में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ...और पढ़ें

दोहा मंदिर से चालदा देवता को कचटा लाने के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं व कारसेवकों का सैलाब। समिति

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भगत सिंह तोमर, साहिया (देहरादून)। श्री चालदा महासू महाराज की दोहा से कचटा मंदिर तक की प्रवास यात्रा में आस्था व परंपरा का अदभुत संगम दिखाई दिया। प्रवास यात्रा में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ा।
पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया। खत कोरू से श्रद्धालुओं का जत्था (जोझोड़िए) पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ प्रवास यात्रा में शामिल रहे। देवपालकी को कंधा लगाकर पुण्य कमाने के लिए श्रद्धालु उमड़े।
16 लोक वाद्य यंत्र ढोल, नगाड़े, पांच रणसिंगे व 16 दमाऊं के साथ पारंपरिक लोकधुनों के बीच ग्रामीणों ने अपनी समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया।

पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और जय हो श्री चालदा महासू महाराज के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जौनसार बावर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
खत सैली के दोहा गांव में युवतियों की आंखों में देवता की विदाई व खत कोरू के कचटा गांव में लड़कियों की आंखों में देवता के आने की खुशी के आंसू दिखाई दिए।
शुक्रवार का दिन खत कोरू के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि चालदा महासू महाराज 39 साल बाद कचटा गांव में विराजमान होंगे।
चालदा महासू महाराज की प्रवास यात्रा
- 23 मई 2011 लखवाड़ गांव से खत सिलगांव के जिसऊ घराना।
- 10 मई 2014 जिसऊ घराना गांव से खत अंठगाव चन्दोऊ गांव।
- 9 जून 2016 चन्दोऊ गांव से खत बमटाड़ के नराया गांव।
- 11 जून 2018 नराया गांव से खत तपलाड़ के कोटा गांव में।
- 30 जून 2022 कोटा गांव से खत बणगांव के घणता गाँव में।
- 16 जून 2024 घणता गाँव से खत सैली के दौहा गांव में।
- 7 मई 2026 दौहा गांव से खत कौरू के कचटा गांव में।
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