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    चारधाम यात्रा से 700 करोड़ की अर्थव्यवस्था, बीकेटीसी अध्यक्ष ने बताया आस्था और आर्थिकी का संगम

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 12:01 AM (IST)

    चारधाम यात्रा सनातनी संस्कृति का दिव्य उत्सव होने के साथ ही पहाड़ की आर्थिकी की रीढ़ है। मंदिर समिति द्वारा यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा ...और पढ़ें

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी।

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी।

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    दिनेश कुकरेती, देहरादून। चारधाम यात्रा सनातनी संस्कृति का दिव्य उत्सव तो है ही, पहाड़ की आर्थिकी की रीढ़ भी है। देश-विदेश से यात्री आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति व पुण्य की प्राप्ति को चारधाम आते हैं और इसी के साथ पहाड़ की अर्थव्यवस्था को भी संबल दे जाते हैं।

    पिछले वर्ष श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बदरी-केदार समेत अन्य धामों की यात्रा से 700 करोड़ का कारोबार किया। सरकार की प्राथमिकता श्रद्धालु हैं और उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए यात्री व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

    यह बातें सोमवार को दैनिक जागरण की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय अकादमिक विमर्श में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहीं।

    द्विवेदी ने कहा कि शुरुआती दौर में यात्रियों की आमद काफी बढ़ जाती है, इसलिए वीआइपी मूवमेंट बंद रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि सामान्य यात्री परेशान न हों।

    इस बार बदरी-केदार धाम में सभी विशेष पूजा दोपहर के बजाय रात में संपन्न की जाएंगी। इससे आम यात्री अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा करा सकेंगे।

    उन्होंने कहा कि 2014 से पहले यात्रा करना बहुत कठिन था, लेकिन अब आलवेदर रोड व दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कारिडोर बनने, एयर कनेक्टिविटी बेहतर होने और आधारभूत ढांचे में सुधार से यात्रा की राह आसान हो गई है।

    सघन एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां 11 दुर्गम स्थानों से एयर कनेक्टिविटी बनी हुई है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूर्ण होने के बाद यात्रा पूरी तरह सुरक्षित एवं सुगम हो जाएगी।

    आदि शंकराचार्य की व्यवस्था का पालन

    मंदिर समिति अध्यक्ष ने कहा कि चारधाम में गर्भगृह व मंदिर परिसर के आसपास गैर सनातनियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह व्यवस्था स्वयं आदि शंकराचार्य की बनाई हुई है।

    दरअसल, तीर्थाटन व पर्यटन दोनों अलग-अलग हैं। तीर्थों में लोग ध्यान, साधना व आध्यात्मिक शांति के लिए आते हैं, जबकि पर्यटन विशुद्ध मनोरंजन है। इसलिए मंदिर समिति ने तीर्थ पुरोहित व हक-हकूकधारियों के साथ विमर्श के बाद यह निर्णय लिया।

    लोकल फार वोकल पर जोर

    यात्रा को सीधे आर्थिकी से जोड़ने के लिए सरकार व मंदिर समिति का लोकल फार वोकल पर जोर है। स्थानीय उत्पादों से धामों में प्रसाद तैयार किया जा रहा है।

    पूरे यात्रा मार्ग पर स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में होम स्टे खोले हुए हैं, जिससे उन्हें अच्छी आय हो रही है। डंडी-कंडी व घोड़ा-खच्चर संचालन में भी स्थानीय लोगों की बड़ी भूमिका है।

    स्वच्छ एवं हरित यात्रा

    सरकार ने इस बार स्वच्छ एवं हरित चारधाम यात्रा का संकल्प लिया है। इसके तहत व्यापक स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने में तमाम स्वयं सेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।

    यात्रियों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रकृति को प्रदूषित कर हम एक तरह से ईश्वर का ही अनादर करेंगे, इसलिए हरित यात्रा हमारा मुख्य ध्येय होना चाहिए।

    सारा की सनातन में अटूट आस्था

    द्विवेदी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सनातनी नहीं है, लेकिन सनातन में उसकी अटूट आस्था है तो वह मंदिर समिति को शपथ पत्र देकर बदरी-केदार धाम आ सकता है।

    अभिनेत्री सारा अली खान इसका उदाहरण हैं। वह शिव भक्त हैं, त्रिपुंड लगाती हैं और उनकी मां भी हिंदू हैं। हालांकि, ऐसे श्रद्धालु चुनिंदा ही हैं।

    लाकर रूम में रखे जाएंगे मोबाइल

    द्विवेदी ने कहा कि इस बार मंदिर परिसर के आसपास कोई व्यक्ति मोबाइल फोन व कैमरा नहीं ले जा सकेगा। ब्लागरों पर भी रोक लगाई गई है। मोबाइल रखने के लिए मंदिर परिसर में लाकर रूम बनाए गए हैं। सभी को इन्हीं में अपने मोबाइल रखने होंगे।

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    अधिकृत वेबसाइट पर ही करें हेली टिकट बुक

    हेली यात्री अमूमन साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, इसलिए सरकार व मंदिर समिति उन्हें लगातार सतर्क कर रही हैं।

    फिर भी किसी यात्री के साथ ठगी हो जाती है तो उसे तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए।

    यात्री केदारनाथ के लिए अधिकृत वेबसाइट : https://heliyatra.irctc.co.in और बदरीनाथ के लिए अधिकृत वेबसाइट : https://helitaxii.com पर हेली टिकट बुक कराएं।

    सेवा-सुश्रुषा को मंदिर समिति तत्पर

    किसी तरह की आपदा की स्थिति में मंदिर समिति की ओर से अपनी 27 धर्मशालाओं में यात्रियों के लिए खाने-ठहरने की निश्शुल्क व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा यात्री भी जगह-जगह भंडारा लगाते हैं। स्थानीय लोग भी सहयोग में पीछे नहीं रहते।

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