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    दून में आपरेशन सिंदूर कार्यक्रम में गरजे CM धामी, बोले- सेना के शौर्य पर सवाल उठता है तो खौलता है खून

    Updated: Tue, 12 May 2026 12:00 AM (IST)

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेना के शौर्य पर सवाल उठाने वालों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सेना का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और ...और पढ़ें

    दून सैनिक इंस्टीट्यूट, गढ़ी कैंट में आपरेशन सिंदूर-शौर्य, सम्मान और वीरता का एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण

    दून सैनिक इंस्टीट्यूट, गढ़ी कैंट में आपरेशन सिंदूर-शौर्य, सम्मान और वीरता का एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। जागरण

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब कोई सेना के शौर्य और पराक्रम पर सवाल उठाता है तो उनका खून खौल उठता है।

    उन्होंने कहा कि सीमाओं पर विषम परिस्थितियों में तैनात जवानों के त्याग और समर्पण का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

    गढ़ी कैंट स्थित दून सैनिक इंस्टीट्यूट में आपरेशन सिंदूर की प्रथम वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं एक सैनिक परिवार से हैं।

    सैनिकों के बीच आना हमेशा गर्व और आत्मीयता का अनुभव कराता है। देश के सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की रक्षा करते हैं, तभी देशवासी सुरक्षित हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति को स्वीकार रही है, देश में कुछ लोग सेना के साहस और पराक्रम पर सवाल उठाते हैं।

    वह एसी कमरों में बैठकर सेना से सबूत मांगते हैं। यह वही लोग हैं, जो कश्मीर से धारा-370 हटने पर खून-खराबे और देश में अशांति की बात करते थे, लेकिन आज वहां विकास, सुशासन और जनभागीदारी का नया माहौल है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक विरोध में देश हित को भी नजरअंदाज करने लगे हैं। जनता सब समझती और समय आने पर जवाब भी देती है।

    मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा का भी उल्लेख किया। कहा कि मौसम सहित अन्य चुनौतियों के बावजूद यात्रा सुचारु रूप से संचालित है।

    रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पर कुछ लोग रील बनाकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने का काम कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि लोग उनकी सरकार या पार्टी की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन देश के धामों और सनातन पर प्रश्न नहीं उठाने चाहिए। सनातन पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा।

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