देहरादून में छोटे गैस सिलिंडर का संकट गहराया, छात्रों-श्रमिकों की रसोई पर आफत
देहरादून में 5 किलो वाले छोटे गैस सिलिंडरों की आपूर्ति ठप होने से हजारों छात्र, श्रमिक और निजी क्षेत्र के कर्मचारी भोजन पकाने के संकट से जूझ रहे हैं। ...और पढ़ें

ढाबों-रेस्टोरेंट में भी चूल्हे ठंडे, कामर्शियल गैस संकट ने बढ़ाई मुश्किलें। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, देहरादून। पांच किलो वाले छोटे गैस सिलिंडर की आपूर्ति ठप पड़ने से देहरादून में हजारों छात्र, श्रमिक और निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के सामने भोजन पकाने का संकट गहरा गया है।
गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर छोटे सिलिंडर उपलब्ध नहीं हैं, जबकि गैस संकट बढ़ने के बाद तेल कंपनियों ने इनकी आपूर्ति भी लगभग रोक दी है। सुबह से शाम तक लोग एजेंसियों और पंपों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं सिलिंडर नहीं मिल रहा।
दून में किराये के कमरों में रहने वाले छात्रों, फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पांच किलो सिलिंडर सबसे आसान विकल्प था, क्योंकि इसके लिए अलग कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती। अब यही सुविधा बंद होने से सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ा है जो सीमित साधनों में रोजमर्रा की रसोई चलाते हैं।
कई इलाकों में लोग अस्थायी इंतजाम कर भोजन बना रहे हैं, जबकि कुछ ने बाहर खाने पर निर्भरता बढ़ा दी है। गैस संकट के बीच जिला प्रशासन की ओर से छोटे सिलिंडर उपभोक्ताओं के लिए कोई अलग व्यवस्था नहीं बनाई गई है। इससे रोजमर्रा की जरूरतों पर सीधा असर पड़ रहा है।
ढाबों पर असर, सस्ता भोजन भी मुश्किल
स्थिति सिर्फ घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं रही। जिन छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट पर छात्र और कामकाजी लोग निर्भर रहते थे, वहां भी कामर्शियल सिलिंडर की कमी के कारण भोजन पकाने में दिक्कत बढ़ गई है। कई प्रतिष्ठानों ने सीमित मात्रा में खाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कुछ जगहों पर रसोई बंद करने की नौबत आ गई है। इससे कम बजट में भोजन करने वालों की परेशानी और बढ़ गई है।
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पंपों से लौट रहे खाली सिलिंडर
पेट्रोल पंप संचालकों ने भी खाली छोटे सिलिंडर वापस तेल कंपनियों को लौटाने शुरू कर दिए हैं, क्योंकि नई आपूर्ति नहीं आ रही। यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो किराये पर रहने वाले छात्रों और श्रमिकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। कई लोग पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने लगे हैं।
'छोटे सिलिंडर उपलब्ध कराने को लेकर आयल कंपनियों को पत्र लिखा गया है, ताकि छात्रों, श्रमिकों और निजी क्षेत्र में काम करने वालों को परेशानी न हो।' - केके अग्रवाल, जिला पूर्ति अधिकारी
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