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    देहरादून में बाल आयोग का छापा, मेडिकल एंबेसडर संस्थान में विदेशी फंडिंग और मतांतरण का खेल

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 10:03 AM (IST)

    बाल आयोग ने देहरादून के मेडिकल एंबेसडर संस्थान पर छापा मारा, जहां विदेशी फंडिंग और संदिग्ध दस्तावेज़ मिले। संस्थान पर बच्चों को शिक्षा के नाम पर मतांत ...और पढ़ें

    बाल आयोग की टीम द्वारा अचानक की गई कार्रवाई से संस्थान स्टाफ में मचा हड़कंप। जागरण

    बाल आयोग की टीम द्वारा अचानक की गई कार्रवाई से संस्थान स्टाफ में मचा हड़कंप। जागरण

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। प्रेमनगर के खैरी गांव स्थित मेडिकल एंबेसडर संस्थान पर उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने छापेमारी की। टीम को संस्थान में विदेशी फंडिंग के संकेत मिले। इसके अलावा कई अभिलेख संदिग्ध अवस्था में मिले।

    वहीं, बच्चों को शिक्षा व सामाजिक सेवा एवं सहायता के नाम पर मतांतरण से जुड़ी गतिविधियों की संलिप्ता उजागर हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग टीम ने पुलिस प्रशासन को सभी रिकार्ड सौंपेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। संस्थान में वर्तमान में सात बच्चे अंग्रेजी और कंप्यूटर की पढ़ाई करते मिले।

    खैरी गांव में संचालित मेडिकल एंबेसडर संस्थान पर उत्तराखंड बाल आयोग की अध्यक्ष डा.गीता खन्ना की नेतृत्व में छापेमारी की गई। अचानक हुई कार्रवाई से संस्थान के स्टाफ में भगदड़ मच गई। इस दौरान टीम को संस्थान से जुड़े रजिस्टर, प्रचार सामग्री, पोस्टर, फाइलें संदिग्ध प्रतीत हुए।

    मतांतरण की गतिविधियों की होगी जांच

    दस्तावेजों में एक विशेष धार्मिक विचारधारा की ओर आकर्षित कर मतांतरण की गतिविधियों की ओर रुझान की पुष्टि हुई। वहीं, स्टाफ के नाम पर मणिपुर निवासी चालक कार्यरत मिला, जबकि पौड़ी जिले संबंधित एक परिवार कई वर्षों से परिसर में रहता मिला।

    आयोग अध्यक्ष डा. गीता खन्ना ने बताया कि दस्तावेजों और प्रारंभिक तथ्यों से संकेत मिले हैं कि दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों की सहायता के नाम पर विभिन्न विभागों, संस्थानों व अन्य स्रोतों से आर्थिक सहायता के प्रयास करने की पुष्टि हुई है।

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    उन्होंने बताया कि संस्थान की ओर से लाभ और प्रलोभन के जरिये धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने बताया कि संस्थान की गतिविधियां शैक्षणिक व सामाजिक सेवा तक सीमित नहीं हैं। मामले में सभी दस्तावेज, अभिलेख व फाइलें पुलिस प्रशासन को सौंपेंते हुए विस्तृत जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    जांच में खुलेंगी विदेश फंडिंग की परतें

    डा. खन्ना ने बताया कि मतांतरण का नेटवर्क एक स्थान तक सीमित नहीं है। कई राज्यों तक इसके फैले होने की संभावना और संकेत मिले हैं। विदेशी फंडिंग के संकेत भी पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की मासूमियत, शिक्षा व आर्थिक स्थिति और दिव्यांग परिस्थितियों का उपयोग धार्मिक, वैचारिक व अन्य छिपे हुए उद्देश्यों की पूर्ति के लिए नहीं होने दिया जाएगा।

    बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संरक्षण व संस्कार देना संस्थाओं का दायित्व है। मामले में किसी प्रकार के मतांतरण संबंधी कृत्य उजागर हुए तो कठोर कार्रवाई होगी। इस दौरान आयोग के सचिव एसके बर्नवाल ने पूरी निरीक्षण प्रक्रिया का पर्यवेक्षण किया।