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    देहरादून में घरेलू सिलिंडर में 90 हजार का बैकलाग, रेस्टोरेंट-ढाबों पर बढ़ रहा संकट

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 07:39 AM (IST)

    देहरादून में घरेलू गैस सिलेंडरों का 90 हजार का बैकलॉग बना हुआ है, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति अभी भी पटरी पर नहीं लौटी है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। जिले में घरेलू सिलिंडर की लगातार आपूर्ति के बाद भी बैकलाग का आंकड़ा घट नहीं पा रहा है। वहीं, कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति अभी पटरी पर नहीं लौट पाई है। वहीं, छोटी दुकानें, रेस्टाेरेंट , ढाबों व रेहड़ी-ठेलियाें पर संकट लगातार बढ़ रहा है।

    गैस की कमी के कारण कई प्रतिष्ठान बंद होने की नौबत में पहुंच गए हैं। कई प्रतिष्ठान स्वामी दूसरे विकल्प लकड़ी, कोयला भट्टी व बिजली उपकरणों के जरिये अपने रेस्टोरेंट व ढाबों को संचालित कर रहे हैं। उधर, 31 प्रतिशत कमर्शियल गैस की आपूर्ति शिक्षा, स्वास्थ्य आदि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों तक ही सिमट कर रह गई है।

    ईरान व अमेरिका-इजरायल युद्ध ने गैस उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ाई हुई है। करीब एक माह से जारी युद्ध ने घरेलू व कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं के सामने मुसबित खड़ी कर रखी है। हालांकि, घरेलू गैस की आपूर्ति से उपभोक्ता थोड़ी राहत महसूस जरूर कर रहे हैं, लेकिन बैकलाग का आंकड़ा घटने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध शुरू होने के दो-तीन दिन बाद जिले के उपभोक्ताओं ने बड़ी संख्या में गैस बुकिंग कराई थी।

    वहीं, एजेंंसियों की ओर से शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन उपभोक्ताओं के घर पर सिलिंडर डिलवर भी हो रहे हैं, लेकिन बैकलाग का आंकड़ा 90 हजार से नीचे नहीं आ पाया है। वहीं, कमर्शियल सिलिंडर की सीमित आपूर्ति से व्यवासयिक प्रतिष्ठानों में चूल्हे ठंडे पड़ते जा रहे हैं।

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    विभागीय सूत्रों ने बताया कि अभी कमर्शियल क्षेत्र में 31 प्रतिशत गैस की आपूर्ति दी जा रही है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, हास्टल व अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गैस आपूर्ति अनिवार्य है। ऐसे में आपूर्ति के सीमित होने से छोटे कारोबारियों पर्याप्त गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। खासकर, छोटी दुकानें, रेस्टोरेंट-ढाबें व रेहड़ी-ठेलियाें के ठप होने की नौबत आ गई है।

    बस पक रहे दाल-चावल, अधिक ईंधन की खपत वाले व्यंजन बंद

    पथरी बाग चौक स्थित फूडीज हब के स्वामी महावीर राणा ने बताया कि गैस की कमी के कारण रोटी व, राजमा, छोले व दाल-चावल तैयार किए जा रहे हैं। लकड़ी व कोयले से भट्टी के जरिये सभी व्यंजन तैयार कर रहे हैं। अधिक ईंधन की खपत वाले सभी व्यंजन चाऊमीन, मोमोज व पराठे बंद कर दिए गए हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई ग्राहक निराश होकर लौट रहे हैं।

    भट्टी पर तैयार हो रहा चिकन

    भंडारी बाग स्थित फास्ट फूट के स्वामी राज कुमार ने बताया कि एक माह से गैस ही नहीं मिली है। कारोबार को जारी रखने के लिए भट्टी पर चिकन, मछली व चावल तैयार कर रहे हैं। चाऊमीन, बर्गर व मोमोज फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। इससे ग्राहकों की संख्या बहुत कम हो गई है। वहीं, लागत और मेहतन अधिक लगने से परेशानी बन रही है।

    गैस की कमी से रेस्टारेंट हुए बंद

    सर्वे चौक स्थित भट्ट रेस्टारेंट और करनपुर स्थित न्यू रेड चिल्ली फैमिली रेस्टारेंट बंद हो गए है। चिल्ली रेस्टारेंट के स्वामी आशीष सोनकर ने कहा कि पर्याप्त गैस नहीं मिलने से रेस्टोरेंट संचालित रख पाना मुश्किल था। ऐसे में कुछ दिनों के लिए इसे बंद कर दिया गया है। गैस की आपूर्ति सही होने पर फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

    गैस सिलिंडर से तैयार हो रही डीजल भट्टी

    गैस की परेशानी को देखते लोगों ने नये-नये तरीके अपनाने शुरू कर दिए है। गैस सिलिंडर वाले डीजल भट्टी की खूब मांग हो रही है। प्रिंस चौक स्थित दुकानदार कासीम प्रतिदिन चार से पांच इसी तरह की भट्टी तैयार कर रहे हैं। कासीम ने बताया कि वह आर्डर भी इन्हें तैयार करते है। छोटे सिलिंडर को काटकर इसे पाइप के के जरिये चूल्हे से जोड़ा जाता है। एक भट्टी तैयार करने के लिए सात से एक हजार रुपये लेते हैं, जबकि बाजार में इसे आर्डर पर तीन हजार रुपये तक बेचा जा रहा है।

    दो पहिया वाहनों से डिलीवरी पर प्रतिबंध नहीं

    दो पहिया वाहनों से गैस सिलिंडर की डिलीवरी पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसके लिए डिलीवरी मैन के पास जरूरी दस्तावेज होने चाहिए। डीएसओ केके अग्रवाल ने बताया कि दो पहिया वाहन बाइक व स्कूटर से सिलिंडर डिलीवरी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी के डिलीवरी मैन को डिलीवरी के समय ड्रेस ,वाहन से संबंधित जरूरी दस्तावेज व अनुबंधित पत्र अपने पास रखना अनिवार्य है। गैस की कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। ऐसे में प्रत्येक डिलीवरी मैन को संबंधित दस्तावेज अपने पास रखना अनिवार्य है।

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