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    देहरादून में 'लखपति दीदी' बनीं आत्मनिर्भर, 1.97 करोड़ का यूजर चार्ज मिला, नगर आयुक्त ने सौंपा चेक

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 03:15 PM (IST)

    देहरादून नगर निगम ने 47 'लखपति दीदी' स्वयं सहायता समूहों को 1.97 करोड़ रुपये के यूजर चार्ज का लाभ दिया। महापौर और नगर आयुक्त ने चेक सौंपकर महिलाओं को ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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    जागरण संवाददाता, देहरादून। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ पहल को बल देते हुए शहर के विभिन्न वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण कार्य से जुड़ी 47 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को यूजर चार्ज से प्राप्त धनराशि के चेक वितरित किए।

    सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में महापौर सौरभ थपलियाल और नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने महिलाओं को चेक सौंपते हुए उन्हें स्वरोजगार, स्वावलंबन और आर्थिक उन्नति के लिए शुभकामनाएं दीं।

    महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

    उन्होंने कहा कि नगर निगम देहरादून इस संकल्प को धरातल पर उतारते हुए महिलाओं को स्वच्छता व्यवस्था से जोड़कर सम्मानजनक रोजगार और नियमित आय उपलब्ध करा रहा है।

    नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण और स्वरोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

    बीते वित्तीय वर्ष में करीब दो करोड़ रुपये शुल्क वसूला

    नगर निगम के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में 64 लाख 19 हजार 685, तीसरी तिमाही में 51 लाख 38 हजार 635 और चौथी तिमाही में 81 लाख 62 हजार 198 का संग्रह हुआ।

    इस प्रकार पूरे वित्तीय वर्ष में एक करोड़ 97 लाख 20 हजार 518 का उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहित किया गया, जिसका श्रेय स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी, नागरिकों के सहयोग और निगम की प्रभावी मानिटरिंग व्यवस्था को दिया गया।

    चौथी तिमाही के प्रदर्शन के आधार पर वार्ड-98 का ‘आदर्श’ स्वयं सहायता समूह पांच लाख 83 हजार 590 के संग्रहण के साथ प्रथम, वार्ड-4 का ‘अपेक्षा’ तीन लाख 59 हजार 240 के साथ द्वितीय और वार्ड-64 का ‘कात्यायनी आजीविका’ तीन लाख 30 हजार 430 के संग्रहण के साथ तृतीय स्थान पर रहा।