उत्तराखंड स्टेट डाटा सेंटर पर साइबर हमला, मालवेयर की तलाश तेज; डाटा चोरी की आशंका
स्टेट डाटा सेंटर पर हुए साइबर हमले के बाद 20 से अधिक सरकारी वेबसाइटें प्रभावित हुईं, जिसमें मालवेयर की तलाश जारी है। अधिकारियों का दावा है कि डाटा सुर ...और पढ़ें

HighLights
स्टेट डाटा सेंटर पर साइबर हमला, 20 से अधिक वेबसाइटें प्रभावित।
मालवेयर की तलाश जारी, प्रभावित मशीनें बदली जा रही हैं।
अधिकारी बोले डाटा सुरक्षित, पर चोरी की आशंका बरकरार।
राज्य ब्यूरो, देहरादून। स्टेट डाटा सेंटर में दो दिन पूर्व हुए साइबर हमले में 20 से अधिक विभागों की वेबसाइट प्रभावित हुईं थीं। इनमें कुछ चंद समय तो कुछ दो घंटे तक प्रभावित रहीं। माना जा रहा है कि यह मालवेयर अभी भी मशीनों में छिपा बैठा हो सकता है। इसके लिए लगातार पड़ताल जा रही है।
वहीं, इससे प्रभावित मशीनों को बदला भी जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सोमवार को भी कुछ मशीनों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है यद्यपि, अधिकारी इससे साफ इनकार कर रहे हैं।
स्टेट डाटा सेंटर में शनिवार को मालवेयर मशीनों में प्रवेश कर गया था। इससे कई विभागों की सेवाएं तुरंत प्रभावित हुई। विभागीय अधिकारियों का दावा था कि आठ से दस विभागाें की वेबसाइट प्रभावित थी।
यद्यपि, सूत्रों की मानें तो यह संख्या इससे अधिक थी। इस दौरान आइटीडीए के विशेषज्ञों ने तुरंत प्रभावित मशीनों को बंद करते हुए दूसरी मशीनों के जरिये व्यवस्था को फिर से बहाल किया। सूत्रों की मानें तो पहले दिन इस मालवेयर ने काफी नुकसान पहुंचाया।
इसके बाद हेकर थोड़ा चुप बैठा हुआ है। इसे रैनसम वायरस इसलिए नहीं माना जा रहा है क्योंकि अभी तक हेकर की तरफ से कोई मांग नहीं की है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि वह काफी डाटा चुरा चुका है, यद्यपि, इस मालवेयर के और ज्यादा मशीनों में घुसने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
वहीं, निदेशक आइटीडीए आलोक कुमार पांडेय का कहना है कि डाटा पूरी तरह सुरक्षित है। सारी मशीनें सुचारू रूप से चल रही हैं। जहां तक साइबर हमलों की बात है तो हर दिन इस पर हमले होते रहते हैं। इससे डाटा सेंटर का पूरी तरह सुरक्षित किया गया है।
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इस समय प्रदेश के सभी विभागों का डाटा स्टेट डाटा सेंटर में उपलब्ध है। इस डाटा की वैश्विक स्तर पर काफी मांग है। बड़ी कंपनियों से लेकर बड़े देश दूसरों का डाटा अपने पास रखना चाहते हैं। इससे दूसरे देश की आर्थिकी को प्रभावित किया जा सकता है। यही कारण है कि स्टेट डाटा सेंटर में लगातार डाटा चोरी के लिए हमले हो रहे हैं।