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    बारिश बनी बहाना, देहरादून में सिस्टम बना 'जानलेवा'; एक युवक की मौत

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 01:08 PM (IST)

    देहरादून में बारिश के दौरान खुले नाले में गिरने से 21 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जिससे शहर की लचर व्यवस्था और मानसून तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए ...और पढ़ें

    21 वर्षीय युवक की मौत ने खोली शहर की हकीकत।

    21 वर्षीय युवक की मौत ने खोली शहर की हकीकत।

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    अंकुर अग्रवाल, देहरादून। यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आइना है, जिसने बरसात के मौसम में पूरे शहर को जोखिम के भरोसे छोड़ दिया है। शुक्रवार को बारिश के दौरान सड़क और नाली का फर्क मिट गया।

    पानी में डूबी नाली दिखाई नहीं दी और उसमें गिरने से 21 वर्षीय युवक की जान चली गई। सवाल यह नहीं कि युवक नाली में कैसे गिरा। बड़ा सवाल यह है कि ऐसी नौबत आई ही क्यों? आखिर शहर की नालियां बिना सुरक्षा के क्यों हैं, जलभराव के बीच लोगों को आगाह करने के इंतजाम क्यों नहीं हैं और हर मानसून में वही हालात बनने के बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां सबक क्यों नहीं लेतीं।

    शहर की सड़कों को खतरनाक बना देती है बारिश

    देहरादून में यह पहला मामला नहीं है। हर बारिश शहर की सड़कों को खतरनाक बना देती है। कहीं उफनते नाले, कहीं ओवरफ्लो नालियां, कहीं पानी में छिपे गहरे गड्ढे और कहीं धंसी सड़कें।

    घर से निकलने वाला हर व्यक्ति यह नहीं जानता कि उसके अगले कदम के नीचे सड़क होगी या मौत का गड्ढा। विडंबना यह भी है कि मानसून से पहले हर वर्ष नालों की सफाई, जलनिकासी सुधार और सड़क मरम्मत के दावे किए जाते हैं।

    करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, बैठकें होती हैं, निरीक्षण होते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश पूरी तैयारी की पोल खोल देती है। इस वर्ष भी शहर के कई हिस्सों में पहली ही बारिश में जलभराव, चोक नालियां और सड़कें पानी में डूब गई थीं।

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    यही नहीं, गुजरे कुछ सप्ताह में नंदा की चौकी के नए पुल की एप्रोच रोड बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई। शहर की कई सड़कों पर पैचवर्क बह गया और गहरे गड्ढे फिर उभर आए। इससे निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए।

    चार विभागों की जिम्मेदारी, लेकिन 'जिम्मेदार' कोई नहीं

    सबसे चिंताजनक बात यह है कि शहर में जिम्मेदारियां कई विभागों में बंटी गई है। नगर निगम, एमडीडीए, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग और जल संस्थान। लेकिन हादसे के बाद कोई विभाग खुद को जिम्मेदार नहीं मानता। परिणाम यह है कि हर साल घटनाएं दोहराई जाती हैं और हर बार जांच, मुआवजे और आश्वासनों का वही सिलसिला शुरू हो जाता है।

    बुजुर्ग हुए घायल, दो बहनों की हो चुकी है मौत

    फरवरी में सरस्वतीपुरम में सुबह सैर पर निकले एक बुजुर्ग खुले नाले में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कुछ दिन पहले टर्नर रोड पर भारी बारिश में ओवरफ्लो ड्रेनेज चैनल में दो सगी बहनों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अब 21 वर्षीय युवक की जान चली गई। सवाल यह है कि आखिर कितनी मौतों के बाद सिस्टम जागेगा और शहर सुरक्षित बनेगा।

    हर साल वही तस्वीर, हर बार वही दावे

    मानसून शुरू होने से पहले नालों की सफाई, जलभराव रोकने और सड़कों की मरम्मत के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद इस बार भी पहली बारिश में आइएसबीटी, मोहिनी रोड, इंदर रोड, जीएमएस रोड, राजपुर रोड और प्रिंस चौक समेत कई क्षेत्रों में जलभराव और चोक नालों की शिकायतें सामने आईं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या अब 'हर साल की कहानी' बन चुकी है। देहरादून में अब खतरा केवल बारिश नहीं है। खतरा उस व्यवस्था से है, जो हर मानसून से पहले तैयारी के दावे करती है और हर मानसून के बाद हादसों पर अफसोस जताती है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक शहर की सड़कें, नाले और गड्ढे यूं ही किसी न किसी परिवार की खुशियां निगलते रहेंगे।

    इन सवालों का शहर मांग रहा जवाब

    • मानसून से पहले हुई नाला सफाई का सामाजिक आडिट क्यों नहीं?
    • खुले नालों और गहरी नालियों पर सुरक्षा रेलिंग कब लगेगी?
    • जलभराव वाले स्थलों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
    • बारिश के दौरान खतरे वाले स्थानों पर चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग क्यों नहीं होती?
    • हर हादसे के बाद जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होती है?