दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: वन्यजीवों को भा रहा एलिवेटेड रोड का गलियारा, बेखौफ कदमताल कर रहे जंगली जानवर
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना 12 किमी लंबा एलिवेटेड रोड एशिया का सबसे बड़ा ग्रीन कॉरिडोर बन गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, ...और पढ़ें

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के 12 किमी एलिवेटेड रोड का गलियार वन्यजीवों को पसंद आ रहा है।

समय कम है?
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केदार दत्त, देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे विकास और विरासत के संतुलन की बेहद सुखद तस्वीर पेश कर रहा है।
यह न केवल दिल्ली-देहरादून के बीच दूरी कम करने के साथ ही सफर को सुगम बना रहा, बल्कि उत्तराखंड की सीमा में गणेशपुर से डाटकाली तक बना 12 किमी एलिवेटेड रोड के रूप में बने एशिया के सबसे बड़े ग्रीन कारीडोर के रूप में भी पहचान बना चुका है।
राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक रेंज के वन्यजीवों की आवाजाही में कोई खलल न पड़े, इसी उद्देश्य से इसे बनाया गया है। अब गलियारा जीवंत भी हो उठा है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार वन्यजीवों की 18 प्रजातियां बेखौफ हो इस गलियारे में कदमताल कर रही हैं।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे इन दिनों अगले माह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों संभावित लोकार्पण को लेकर चर्चा के केंद्र में है।
यद्यपि, अभी प्रधानमंत्री के दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं मिला है, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर से तैयारियां चल रही हैं।

इस एक्सप्रेसवे के शिवालिक वन क्षेत्र और राजाजी टाइगर रिजर्व के हिस्से में बना एलिवेटेड रोड भी हर किसी के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों के विचरण में कोई खलल न पड़े।
दरअसल, पूर्व में एलिवेटेड रोड के स्थान पर पूर्व में बनी सड़क को चौड़ा करने की योजना थी, लेकिन वन्यजीवों के विचरण की चिंता के दृष्टिगत भारतीय वन्यजीव संस्थान से अध्ययन कराया गया।
इसके आधार पर एलिवेटेड रोड की दिशा में कदम बढ़ाए गए, ताकि ऊपर वाहन फर्राटा भरें और नीचे जंगली जानवर बेरोकटोक इधर से उधर जा सकें।

ताकि बिदकें नहीं वन्यजीव
वाहनों के शोर के कारण वन्यजीव बिदकें नहीं, इसका विशेष ख्याल रखा गया है। इसी के दृष्टिगत एलिवेटेड रोड पर साउंड बैरियर लगाए गए हैं। यही नहीं, ऐसी लाइट लगाई गई हैं, जिनकी रोशनी वन्यजीवों को परेशान न करे।

जीवंत होने लगा गलियारा
एलिवेटेड रोड बनने के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान से अध्ययन कराया जा रहा है कि कहीं इससे वन्यजीवों की आवाजाही पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ा। इसके लिए वहां कैमरा ट्रैप लगाए गए।
संस्थान की प्रारंभिक रिपोर्ट में गत वर्ष मई से जून तक 40 दिन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि इस गलियारे में वन्यजीव निर्बाध आवाजाही कर रहे हैं। इस अवधि में वन्यजीवों की 18 प्रजातियों की तस्वीरें वहां लगे कैमरा ट्रैप में कैद हुईं।
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ये वन्यजीव कर रहे आवाजाही
हाथी, गुलदार, सियार, स्माल इंडियन सीवेट, कामन पाम सीवेट, मानीटर लिजार्ड, भूरा नेवला, चित्तीदार बिल्ली, सेही, खरगोश, चीतल, सांभर, जंगली सूअर, नीलगाय, जंगली मुर्गा, मोर, रीसस बंदर व लंगूर।
एलिवेटेड रोड के रूप में यह गलियारा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे राजाजी टाइगर रिजर्व से उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्र में आने-जाने के लिए वन्यजीवों की राह सुगम हो गई है।
- कोको रोसे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व।
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