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    फिर उठ खड़ा हुआ धराली: दर्द के सैलाब से उबरकर लिखी उम्मीद की नई कहानी, दिखाई आपदा प्रबंधन की नई राह

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:11 AM (IST)

    एक साल पहले धराली में आई विनाशकारी आपदा ने गहरे जख्म दिए थे, लेकिन अब यह कस्बा फिर से उठ खड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री धामी और विभिन्न एजेंसियों के समन्वित ...और पढ़ें

    धराली आपदा की एक साल पहले की तस्वीर और एक साल बाद की तस्वीर।

    धराली आपदा की एक साल पहले की तस्वीर और एक साल बाद की तस्वीर।

    HighLights

    1. एक साल पहले धराली में विनाशकारी आपदा ने गहरे जख्म दिए।

    2. मुख्यमंत्री धामी और एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से राहत-बचाव हुआ।

    3. पुनर्वास व पुनर्निर्माण से धराली ने आपदा प्रबंधन की राह दिखाई।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। एक वर्ष पहले आज ही के दिन उत्तरकाशी के धराली कस्बे में खीरगंगा के रास्ते आई विनाशलीला ने गहरे जख्म दिए थे। कुछ ही पलों में हंसता-खेलता धराली मलबे के ढेर में तब्दील हाे गया। किसी ने घर खोया तो किसी ने वर्षों की मेहनत से खड़ी की गई आजीविका। अपनों से बिछड़ने का दर्द और भविष्य की अनिश्चितता ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था, लेकिन जिंदगी ठहरती नहीं।

    धराली फिर उठ खड़ा हुआ है और जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। धराली की यह वापसी केवल लोगों के अदम्य साहस की कहानी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर शासन-प्रशासन और राहत एजेंसियों के समन्वित प्रयासों का भी परिणाम है। यूं कहें कि इन प्रयासों ने आपदा प्रबंधन की नई राह भी दिखाई है।

    आपदा के बाद सीएम से लेकर शासन-प्रशासन और राहत एजेंसियों ने किए समन्वित प्रयास

    आपदा पर किसी का वश नहीं है, लेकिन समन्वित प्रयासों से उसके असर को न्यून किया जा सकता है। इसका उदाहरण है धराली। पांच अगस्त, 2025 को अपराह्न 1.50 बजे जब आपदा आई, तब मुख्यमंत्री धामी आंध्र प्रदेश के दौरे पर थे। सूचना मिलते ही उन्होंने उच्चाधिकारियों से फोन पर वार्ता कर राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने को कहा। वह यात्रा बीच में ही छोड़कर इसी दिन शाम को देहरादून पहुंचे और रेस्क्यू का अपडेट लिया।

    गृह सचिव को अभियान की निगरानी का जिम्मा सौंपा। उत्तरकाशी जिला प्रशासन से समन्वय को दो आइएएस तैनात किए गए। मंडलायुक्त को नोडल अधिकारी बनाया गया। शासन, जिला प्रशासन, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवकों काे मोर्चे पर लगाया गया।

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    ग्राउंड जीरो पर पहुंचे सीएम धामी

    मौसम की चुनौतियों की परवाह किए बगैर मुख्यमंत्री धामी छह अगस्त को धराली पहुंचे थे। वह प्रभावित परिवारों से मिले और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। आपदाग्रस्त क्षेत्र का जायजा लिया और राहत-बचाव में जुटी टीमों का उत्साहवर्द्धन किया। अगले दो दिन उन्हाेंने फिर स्थिति की समीक्षा की और हेली ऑपरेशन प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

    केंद्र की बराबर रही नजर

    राहत-बचाव कार्य पर केंद्र सरकार की भी बराबर नजर रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नियमित अंतराल में मुख्यमंत्री से फोन पर स्थिति की जानकारी लेते रहे। फलस्वरूप, आपदा प्रबंधन में केंद्र का भरपूर सहयोग राज्य का मिला।

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    मिशन मोड में पुनर्वास व पुनर्निर्माण

    राहत-बचाव अभियान पूरा होते ही सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाया। प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी गई, क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों, पेयजल, विद्युत व्यवस्था को बहाल किया गया। सब-कुछ खोने वाले परिवारों को दोबारा सम्मान के साथ खड़ा करने के प्रयास किए। इस सब पर 35.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

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    कुल मिलाकर, धराली आपदा ने बताया कि यदि त्वरित निर्णय, मजबूत समन्वय और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था हो तो बड़ी से बड़ी त्रासदी के बाद भी जिदंगी को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है।