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    उत्तराखंड में धौलास की जमीन बनी सियासी अखाड़ा, भाजपा ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें

    Updated: Wed, 11 Feb 2026 08:07 AM (IST)

    धौलास में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान को दी गई जमीन का मामला अब राजनीतिक अखाड़ा बन गया है। भाजपा इसे नियम विरुद्ध बताते हुए कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरो ...और पढ़ें

    शेखुल हिंद एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट की भूमि पर गर्माई प्रदेश की राजनीति। जागरण

    शेखुल हिंद एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट की भूमि पर गर्माई प्रदेश की राजनीति। जागरण

    HighLights

    1. धौलास जमीन विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना।

    2. भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण का आरोप लगाया।

    3. मुख्यमंत्री धामी के लिए यह बड़ी परीक्षा।

    अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। धौलास में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान खोलने के लिए शेखुल हिंद एजुकेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट को दी गई जमीन का मामला अब प्रशासनिक दायरे से निकलकर पूरी तरह राजनीतिक अखाड़े में पहुंच चुका है। भाजपा प्रकरण में जिस तरह से मोर्चा संभाले है, उससे साफ है कि पार्टी इसे नियम विरुद्ध जमीन बेचने के विवाद तक सीमित न रखकर राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाना चाहती है। भाजपा की लगातार घेराबंदी से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    भाजपा विधायक व प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात, जमीन आवंटन रद्द करने की मांग व देवभूमि में विधर्मियों की मंशा नहीं चलने देंगे जैसे बयानों से भाजपा ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला उसके लिए प्रदेश की सुरक्षा व सांस्कृतिक पहचान को बचाने का विषय है।

    भाजपा के लिए मुद्दा मुफीद, एक तीर से कई निशाने
    भाजपा इस मुद्दे के सहारे एक तीर से कई निशाने साध रही है। यह विषय सीधे पार्टी के मूल वैचारिक एजेंडे में शामिल राष्ट्रवाद, सैन्य सम्मान और हिंदुत्व से जुड़ा है, साथ ही आइएमए जैसे संवेदनशील सैन्य संस्थान के पास जमीन आवंटन का मुद्दा उठाकर भाजपा इसे देश की सुरक्षा से जोड़ रही है।

    दूसरा, यह मुद्दा कांग्रेस को फिर से तुष्टीकरण की राजनीति के कटघरे में खड़ा करने का अवसर दे रहा है। वर्ष 2022 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद को भाजपा ने जिस तरह चुनावी तौर पर भुनाया था, धौलास का यह मामला उसी राजनीतिक पटकथा की अगली कड़ी जैसा दिखता है।

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    भाजपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2004 में सुरक्षा को नजरअंदाज कर समुदाय विशेष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया था। इस मुद्दे के सहारे अभी से भाजपा पार्टी के कोर वोट बैंक को लामबंद करने की जुगत में है।

    धामी सरकार की परीक्षा भी होगी
    मुख्यमंत्री धामी द्वारा इस प्रकरण में शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन देना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यदि सरकार भूमि को सरकारी कब्जे में लेती है तो, तो भाजपा इसे अपनी वैचारिक व राजनीतिक जीत के रूप में पेश करेगी। हालांकि, अगर मामला कोर्ट में उलझता है या कानूनी जटिलताओं के कारण सरकार पीछे हटती है, तो विपक्ष इस पर पलटवार भी कर सकता है। इसलिए यह मुद्दा भाजपा के लिए अवसर है और बड़ी परीक्षा भी।

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