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    दून पुलिस की चक्रव्यूह रचना फेल: मुख्य मार्गों पर डटी रही भारी फोर्स, 'चोर रास्तों' से निकल गया निहंगों का जत्था

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 02:09 AM (IST)

    देहरादून में पुलिस की भारी तैनाती के बावजूद निहंगों का जत्था वैकल्पिक मार्गों से प्रवेश कर गया, जिससे पुलिस की रणनीति पर सवाल उठ गए। ...और पढ़ें

    निहंगों के प्रवेश करने की सूचना के बाद देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में तैनात पुलिस बल।

    निहंगों के प्रवेश करने की सूचना के बाद देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में तैनात पुलिस बल।

    HighLights

    1. पुलिस की भारी तैनाती के बावजूद निहंगों का जत्था देहरादून में घुसा

    2. मुख्य मार्गों पर तैनात पुलिस को चकमा देकर वैकल्पिक रास्ते अपनाए

    3. पुलिस और खुफिया तंत्र की समन्वय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे

    जागरण संवाददाता, देहरादून। कर्णप्रयाग प्रकरण के बाद गुरुवार रात देहरादून पुलिस की पूरी रणनीति सवालों के घेरे में आ गई।

    संभावित प्रवेश मार्गों पर घंटों तक भारी पुलिस बल तैनात रखने के बावजूद निहंगों का जत्था पुलिस के हाथ नहीं लगा। देर रात तक पुलिस टीमें शहर के विभिन्न इलाकों में तलाश करती रहीं और लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश देती रहीं।

    पांवटा साहिब की ओर से निहंगों के जबरन देहरादून सीमा में घुसने की सूचना पर प्रेमनगर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल स्वयं मौके पर पहुंचे और सभी थानों की फोर्स, पीएसी तथा अन्य पुलिसकर्मियों को बुलेटप्रूफ जैकेट और आधुनिक हथियारों के साथ तैनात किया गया।

    जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान भी मौके पर मौजूद रहे। करीब दो घंटे तक पुलिस संभावित मार्गों पर इंतजार करती रही, लेकिन जत्था वहां नहीं पहुंचा।

    इसके बाद सूचना मिली कि जत्था वैकल्पिक मार्ग से आगे निकल गया है। इससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। देर रात आईएसबीटी क्षेत्र में जत्थे के होने की सूचना पर पुलिस टीमें वहां पहुंचीं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

    इसके बाद हरिद्वार बाईपास, शिमला बाईपास और अन्य प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त नाकेबंदी कर दी गई। वाटर कैनन, खाली बसें और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात रखा गया।

    मुख्य मार्ग संभाले रही पुलिस, निहंग वैकल्पिक मार्ग से घुस गए

    सूत्रों का कहना है कि जत्थे ने अंतिम समय में अपना मार्ग बदल दिया, जबकि पुलिस की अधिकांश तैयारी संभावित मुख्य मार्गों पर केंद्रित रही। इसी कारण पुलिस को देर रात तक लगातार सूचनाओं के आधार पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक दौड़ना पड़ा।

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    पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र की समन्वय व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि इनपुट पहले से उपलब्ध थे तो जत्थे की वास्तविक आवाजाही और संभावित मार्गों की सटीक जानकारी पुलिस तक क्यों नहीं पहुंच सकी।

    यही वजह रही कि देर रात तक पूरा पुलिस महकमा अलर्ट पर रहने के बावजूद तलाश अभियान ही चलाता रहा।

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