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कभी 3 अंक से टूटा सपना; 18 साल बाद शादी और मातृत्व के बीच दीपिका ने क्रैक की NEET परीक्षा; बताया सफलता का मंत्र

Published: Sat, 29 Aug 2026 10:47 PM (IST)

डॉ. दीपिका खांडूजा ने 18 साल बाद अपने पहले प्रयास में नीट परीक्षा पास कर देहरादून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट हासिल की।

डॉ. दीपिका खांडूजा

डॉ. दीपिका खांडूजा

HighLights

  1. डॉ. दीपिका ने 18 साल बाद नीट परीक्षा पास की।

  2. देहरादून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट हासिल की।

  3. दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से सपना पूरा किया।

संवाद सहयोगी, देहरादून। कभी मेडिकल की पढ़ाई का सपना 18 साल पहले महज तीन अंकों से अधूरा रह गया था। शादी और मातृत्व के बाद बढ़ी जिम्मेदारियों के बावजूद डॉ. दीपिका खांडूजा ने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। करीब 18 साल बाद दोबारा पढ़ाई शुरू कर उन्होंने पहले ही प्रयास में नीट क्वालिफाई किया और उत्तराखंड स्टेट कोटे से देहरादून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट हासिल की।

डॉ. दीपिका वर्तमान में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (हिम्स), जौलीग्रांट के न्यूरोलाजी विभाग में स्ट्रोक काउंसलर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2008 से 2013 के बीच बीडीएस की पढ़ाई की थी। मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने के प्रयास में वह प्रवेश परीक्षा में तीन अंकों से पीछे रह गई थीं। वर्ष 2016 में विवाह और बाद में बेटे के जन्म के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने करियर को आगे बढ़ाया।

छात्रों से की सकारात्मक सोच बनाए रखने की अपील

हिम्स के न्यूरोलॉजी विभाग में कार्य करते हुए वरिष्ठ न्यूरो चिकित्सक डॉ. दीपक गोयल ने उन्हें दोबारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। परिवार और सहयोगियों के समर्थन से उन्होंने तैयारी शुरू की और सफलता हासिल की।

डॉ. दीपिका ने कहा कि एक परीक्षा जिंदगी का फैसला नहीं होती। असफलता को जीवन की असफलता नहीं मानना चाहिए। मंजिल तक पहुंचने में समय लग सकता है, लेकिन लक्ष्य के प्रति विश्वास और निरंतर मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है। वह अपनी सफलता में ध्यान, सकारात्मक सोच और एचआइएचटी के संस्थापक ब्रह्मलीन डॉ. स्वामी राम की शिक्षाओं को भी महत्वपूर्ण मानती हैं।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माणा ने डॉ. दीपिका को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने विद्यार्थियों से परीक्षा के दबाव में सकारात्मक सोच बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की।

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