देहरादून का नटवरलाल: आइपीएस बनने का सपना टूटा तो ठगी का रास्ता चुना
पूर्व मुख्य सचिव के बेटे आर यशोवर्धन को देहरादून में फर्जी आईपीएस बनकर लाखों की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ...और पढ़ें

राजपुर थाना पुलिस की ओर से गिरफ्तार आरोपित आर यशोवर्धन।
HighLights
पूर्व मुख्य सचिव का बेटा फर्जी आईपीएस बनकर ठगी करता था
नौकरी और टेंडर दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगे
देहरादून में डॉक्टर और छात्र को बनाया शिकार, गिरफ्तार
जागरण संवाददाता, देहरादून। मुख्य सचिव रहते हुए पिता एस. रामास्वामी को मिलने वाले वीवीआइपी ट्रीटमेंट को देख आर यशोवर्धन ने आइपीएस अधिकारी बनने का सपना देखा।
यशोवर्धन ने कई वर्षों तक यूपीएससी की तैयारी की, लेकिन बार-बार परीक्षा देने के बावजूद भी वह सफल नहीं हो पाया। असफलता हाथ लगने पर उसने खुद को फर्जी आइपीएस व खुफिया एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों पर अपना रौब झाड़ना शुरू कर दिया।
आरोपित ने अपने झूठे पद का प्रभाव डालकर नौकरी दिलवाने, टेंडर और अन्य काम जल्दी करवाने के नाम पर आमजन से लाखों रुपये की जालसाजी व धोखाधड़ी करना शुरू कर दिया।
उसके बात करने का तरीका, वर्दी व फर्जी पहचान पत्र देखकर लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लेते थे। इसी का फायदा उठाकर वह कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका है।
सिविल सेवा की तैयारी कर चुके यशोवर्धन को हर विषय का अच्छा ज्ञान है, यही कारण था कि वह लोगों को अपने प्रभाव में ले लेता था।
आरोपित ने डा. अनुषा निवासी कैनाल रोड को डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। डा. अनुषा ने बताया कि वह क्यूईडी लैब नामक अनुसंधान एवं परामर्श संस्था की संस्थापक हैं।
15 जून को उनकी मुलाकात आर यशोवर्धन से हुई, आरोपित ने अपना परिचय आइपीएस अधिकारी के रूप में दिया।
इसके बाद कहा कि उसे नारकोटिक्स के बड़े-बड़े मामलों को देखने के लिए स्पेशल फोर्सेज में नियुक्त किया गया है।
उसके पास एक वाकी-टाकी व एनएसजी और एसओजी की वर्दी थी। उन्हें डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4.60 लाख रुपये ठग लिए।
लोगों के सामने वाकी-टाकी पर देता था निर्देश
डा. अनुषा को प्रभावित करने के लिए आरोपित ने तरह-तरह के खेल खेले। पहले बताया कि उसे समय-समय पर दिल्ली, लद्दाख, कारगिल आदि स्थानों पर सरकारी ड्यूटी के लिए जाना पड़ता है।
उसके साथ किसी भी स्थान पर यात्रा करते समय वह वाकी-टाकी पर बात करता था तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को रुकवाने और उन पर कौन-सी धारा लगाई जाए, इस संबंध में निर्देश देता था।
इन्हीं सब बातों से डा. अनुषा प्रभावित हुईं और उन्हें लगा कि वह असली सरकारी अधिकारी है। शुरू में उसने उनकी ओर से राजपुर थाने में दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मामले में सहायता करने की बात कही।
कहा कि वह थाने के दो इंस्पेक्टरों को निलंबित कर चुका है और जीरो-एफआइआर के आधार पर उस मामले के आरोपित को जेल भिजवा दिया है।
एमबीबीएस के छात्र से ठगे थे 15 लाख रुपये
खुद को केंद्र सरकार से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति और विशेष एजेंसियों से संबद्ध बताकर आरोपित ने एमबीबीएस के छात्र से करीब 15 लाख रुपये ठगे थे। आरोपित छात्र अंशुल उपाध्याय की मुलाकात आरोपित यशोवर्धन से 24 मार्च 2026 को हुई।
यशोवर्धन ने स्वयं को केंद्र सरकार में कार्यरत और विभिन्न गुप्त एजेंसियों तथा एसओजी से जुड़ा बताते हुए विश्वास में लिया।
उनकी दिवंगत मां सुमन उपाध्याय के नाम पर कंपनी पंजीकृत कराने और उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप स्थापित करने का प्रस्ताव दिया।
साथ ही स्टार्टअप इंडिया सहित अन्य सरकारी योजनाओं से 20 से 25 लाख रुपये तक की फंडिंग दिलाने का आश्वासन भी दिया।
पूर्व विधायक चैंपियन के बेटे से भी हुआ था विवाद
आर यशोवर्धन का नाम नवंबर 2025 में भी चर्चा में आया था। राजपुर रोड पर वाहन ओवरटेक करने को लेकर उसका पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह से विवाद हुआ था।
खबरें और भी
यशोवर्धन ने मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाया था। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने दिव्य प्रताप सिंह के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। इस प्रकरण में उनके साथ मौजूद सरकारी गनर को भी निलंबित कर दिया गया था।
रौब झाड़कर होटलों में मुफ्त लेता था कमरे
पुलिस जांच में सामने आया है कि आर यशोवर्धन देहरादून के बड़े होटलों में ठहरना पसंद करता था। वह खुद को आइपीएस या अन्य केंद्रीय एजेंसी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर होटल संचालकों पर रौब झाड़ता और कार्रवाई का डर दिखाकर बिना भुगतान के कमरे लेता था।
जिन लोगों को ठगना होता उन्हें भी होटल में बुलाता था। कमरे में सेना और पुलिस की वर्दियां टंगी रहती थीं, वायरलेस सेट रखा होता था।
पूरा माहौल ऐसा बनाया जाता था कि सामने वाले को उसके अधिकारी होने पर जरा भी शक न हो। यही झूठी शानो-शौकत उसके ठगी के खेल का सबसे बड़ा हथियार थी।
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