'जस्सी' से 'बॉर्डर 2' तक का सफर: मोना सिंह बोलीं- ओटीटी ने तोड़ी महिलाओं की 'एक्सपायरी डेट' वाली धारणा
अभिनेत्री मोना सिंह ने 'जस्सी जैसी कोई नहीं' से 'बॉर्डर 2' तक के अपने अभिनय सफर पर बात की, जिसमें उन्होंने ओटीटी को महिला कलाकारों के लिए 'एक्सपायरी ड ...और पढ़ें

जस्सी जैसी कोई नहीं धारावाहिक से प्रसिद्ध हुई अभिनेत्री मोना सिंह से संवाद करती दैनिक जागरण के मुंबई एंटरटेनमेंट ब्यूरो की विशेष संवाददाता स्मिता श्रीवास्तव। जागरण
HighLights
ओटीटी ने महिला कलाकारों की 'एक्सपायरी डेट' की धारणा तोड़ी
सफलता के लिए जीवन में अनुशासन और मेहनत बेहद जरूरी
'जस्सी जैसी कोई नहीं' सीरियल ने इंडस्ट्री में पहचान दी
विकास गुसाईं, देहरादून। जस्सी जैसी कोई नहीं, टीवी सीरियल से रातों-रात घर-घर में पहचान बनाने वाली मोना सिंह आज सिने जगत का जाना पहचाना नाम बन चुकी है।
टीवी सीरियल से अपने अभिनय सफर की शुरूआत करने वाली मोना ने थ्री-इडियट्स, लाल सिंह चड्ढा और बार्डर टू जैसी फिल्म और कोहरा-2, हैप्पी पटेल व मां-कसम जैसे ओटीटी सीरीज के जरिये अपने अभिनय की विविधता का परिचय दिया है।
उनका स्पष्ट मानना है कि सफलता के लिए जीवन में अनुशासन व मेहनत बेहद जरूरी है। हमेशा नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। उनका मानना है कि असफलताएं भी मनुष्य को सीख देती हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। कहा कि ओटीटी से यह धारणा टूटी है कि महिला कलाकार एक्सपायरी डेट के साथ आती हैं।
दैनिक जागरण संवादी के मोना जैसी कोई नहीं सत्र में अभिनेत्री मोना सिंह से दैनिक जागरण के मुंबई एंटरटेनमेंट ब्यूरो की विशेष संवाददाता स्मिता श्रीवास्तव ने संवाद किया। इस दौरान मोना सिंह ने अपने अभिनय जीवन से जुड़े हर प्रश्न का बेबाकी से जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि जस्सी जैसी कोई नहीं सीरियल ने इंडस्ट्री में पहचान दी। एक साधारण लड़की के संघर्ष की कहानी को दर्शकों ने पसंद किया। इस दौरान कई ई-मेल व पत्र भी मिले, जिसमें यह कहा गया था कि इस सीरियल के बाद उनकी बेटियों में भी आत्मविश्वास जगा। वे भी घर से बाहर नौकरी के लिए निकलीं।
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इसने यह भी साबित किया कि सुंदर दिखना ही सबकुछ नहीं बल्कि मन भी सुंदर होना चाहिए। 24 वर्ष पूर्व आया यह सीरियल आज भी उन्हें खुशी देता है। आज भी लोग उन्हें जस्सी जैसी कोई नहीं.. वाली कहकर ही पुकारते हैं।
ओटीटी के संबंध में मोना ने कहा कि इससे उन्होंने यह सीखा कि यदि इंडस्ट्री में लंबा चलना है तो बदलाव करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ओटीटी में उनकी पांच फिल्म व सीरियल रिलीज हो चुके हैं और कुछ नए भी आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा फिल्म से पूरी यूनिट को काफी उम्मीदें थी, लेकिन फिल्म नहीं चली। इसने यह भी साबित किया कि इंडस्ट्री में कड़ी मेहनत के साथ भाग्य की भी जरूरत होती है।
ओटीटी पर अपने नए प्रोजेक्ट प्रीतम और पेड्रो के बारे में बताया कि मशहूर फिल्म निर्माता राजू हिरानी की यह वेब सीरिज साइबर क्राइम आधारित कामेडी-थ्रिलर है।
उन्होंने मशहूर कलाकार अमिताभ बच्चन, आमिर खान, शाहरूख खान व सन्नी देवल के साथ किए कार्यों पर कहा कि सभी बड़े कलाकारों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। ये सभी अपने कामों को गंभीरता से लेते हैं। यदि, कलाकार अपने काम से प्यार रखे और अनुशासन में रहे तो उसे काम जरूर मिलता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म या सीरियल के लिए आडिशन देना अच्छी बात है, इससे कलाकार को यह पता चलता है कि वह उस रोल के लिए उपयुक्त है या नहीं।
उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफार्म में काफी काम है। यह प्लेटफार्म विशेष रूप से महिला कलाकारों के लिए लगातार नए आयाम खोल रहा है। इससे यह धारणा टूटी है कि महिला कलाकार एक्सपायरी डेट के साथ आती है। अब उम्र उनके अभिनय में बाधा नहीं बन रही है।
उन्होंने कहा कि अब महिला कलाकार फिल्मों में एक्शन लीड व खलनायक के रोल में भी नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हैप्पी पटेल और सूबेदार में विलेन का रोल किया है।
उन्होंने स्वीकार किया कि सफलता के साथ दोस्तों की संख्या कम हो जाती है, साथ ही जोड़ा कि जो तब भी साथ रहते हैं, वही सच्चे दोस्त होते हैं। सफलता में कलाकार आगे बढ़ता जाता है, लेकिन विफलता सबको एक साथ लाती है।
मोना ने कहा कि वह सैन्य पृष्ठभूमि से आती हैं। पहले वह भी सेना में जाना चाहती थीं, लेकिन बाद में प्राथमिकताएं बदलती गईं और वह अभिनय के क्षेत्र में आ गईं। बार्डर-टू फिल्म को अपने पिता व तमाम सैन्य कर्मियों को समर्पित करते हुए कहा कि इसका शुरुआती सीन उनके पिता के सैन्य जीवन से काफी मिलता जुलता था।
मोना ने कहा कि उन्होंने इसके निर्देशक अनुराग सिंह से कहा कि यह फिल्म मेरे लिए ही बनी है। मोना ने ओटीटी प्लेटाफार्म को प्रमाणन के दायरे से बाहर रखने की भी पैरवी की।
उन्होंने कहा कि इससे सच्ची कहानियां सामने आ सकेंगी। मां-बाप को भी बच्चों पर नजर रखनी होगी कि वे क्या देख रहे हैं और क्या नहीं।
अभिनय से रिटायरमेंट के संबंध में उन्होंने कहा कि कर्म ही पूजा है, लेकिन पूजा कर्म नहीं है। वह सालों-साल काम करते रहना चाहती हैं।
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