IGNFA दीक्षा समारोह: देश को मिले 109 युवा IFS अधिकारी, महाराष्ट्र की प्रतीक्षा काले बनीं टॉपर
देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के दीक्षा समारोह में 109 भारतीय वन सेवा अधिकारी और दो भूटानी अधिकारी पासआउट हुए। ...और पढ़ें

वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी देहरादून 2024 बैच के भारतीय वन परिवीक्षार्थियों के दीक्षा समारोह में उत्तराखंड कैडर की शिरीन को डिग्री प्रदान करते केंद्रीय मंत्री, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भूपेंद्र यादव। साथ में अपर वन महानिदेशक (व.जी) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय रमेश पांडेय, सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तन्मय कुमार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डा. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया व वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव,पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सुशील कुमार अवस्थी
HighLights
आईजीएनएफए से 109 आईएफएस और 2 भूटानी अधिकारी पासआउट।
महाराष्ट्र की प्रतीक्षा काले ने पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान हासिल किया।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सफल अधिकारियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।
जागरण संवाददाता, देहरादून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) के दीक्षा समारोह में वर्ष 2024-26 पाठ्यक्रम के प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी पासआउट होकर अपने-अपने कैडर में सेवा देने के लिए तैयार हैं।
भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के कुल 109 युवा वनाधिकारी देश को मिले हैं, जबकि दो मित्र राष्ट्र भूटान के अधिकारी भी पासआउट हुए। सर्वाधिक 11 अधिकारी मध्य प्रदेश को मिले हैं, जबकि पांच अधिकारी उत्तराखंड की झोली में आए हैं। पाठ्यक्रम में महाराष्ट्र निवासी और राजस्थान कैडर की अधिकारी प्रतीक्षा नानासाहेब काले ने टॉप किया है।

शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के सभागार में दीक्षा समारोह का उद्घाटन केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया। उन्होंने सफल अधिकारियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए। युवा वनाधिकारियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण पूरा कर रहे अधिकारी विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का क्षरण और मरुस्थलीकरण जैसी चुनौतियां वन अधिकारियों के सामने होंगी। इनसे निपटने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी को समान महत्व देना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल आंकड़ों के विश्लेषण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने में भी होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से उच्च नैतिक मूल्यों, समय के प्रभावी उपयोग, त्याग, करुणा और नेतृत्व क्षमता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
20 माह का प्रशिक्षण पूरा, अब देश को मिलेगा युवा जोश का लाभ
आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने कहा कि संस्थान, जो पहले इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज के नाम से जाना जाता था, वर्ष 1938 से देश की सेवा कर रहा है। अब तक स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों को यहां प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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उन्होंने बताया कि 20 माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को विकसित भारत-2047 की अवधारणा के अनुरूप तैयार किया गया था। इस बैच में 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षाधीन अधिकारी तथा भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षु सहित कुल 111 अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें से 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर आनर्स डिप्लोमा हासिल किया।
इस अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तनमय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, सीईसी के अध्यक्ष सीपी गोयल, अपर वन महानिदेशक संतोष तिवारी, रमेश कुमार पांडेय, अपर सचिव अमनदीप गर्ग, आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी आदि उपस्थित रहे।
पाठ्यक्रम की टॉपर ने हासिल किए तीन प्रतिष्ठित पुरस्कार
पाठ्यक्रम की टॉपर प्रतीक्षा ने तीन सबसे प्रतिष्ठित सरकारी पुरस्कार भी अपने नाम किए। जिसमें ऑल राउंड आउटस्टैंडिंग परफॉर्मेंस पुरस्कार, बेस्ट आल राउंड फारेस्टर पुरस्कार, पी श्रीनिवास मेमोरियल पुरस्कार शामिल हैं।
इन्हें भी मिला मेहनत का इनाम
टॉपर इन कोर फारेस्ट्री सब्जेक्ट्स, कुणाल मिश्रा (छत्तीसगढ़)
संजय कुमार सिंह मेमोरियल पुरस्कार, अंकन बोहरा (गुजरात)
हिल मेमोरियल पुरस्कार, कुणाल मिश्रा (छत्तीसगढ़)
डीसी अग्रवाल पुरस्कार, सना फ़ैयाज़ (अगमुट)
ईपी.जी वेस्टोबे प्रबंधन पुरस्कार, प्रिया धारशिनी एस (राजस्थान)
आरएन माथुर मेमोरियल पुरस्कार, कुणाल मिश्रा (छत्तीसगढ़)
केपी सगरेया श्रेष्ठ वनिक पुरस्कार, सना फ़ैयाज़ (अगमुट)
नीलगिरि वाइल्डलाइफ क्लब पुरस्कार, लोकेश मनोहर पाटिल (महाराष्ट्र)
सुलोचना नायडू मेमोरियल पुरस्कार, सना फ़ैयाज़ (अगमुट)
डीएच कुलकर्णी पुरस्कार (वर्किंग प्लान एक्सरसाइज), लोकेश मनोहर पाटिल (महाराष्ट्र)
बीएन गांगुली अकादमिक उत्कृष्टता पुरस्कार, सना फ़ैयाज़ (अगमुट)
केएम तिवारी मेमोरियल पुरस्कार, शशांक भारद्वाज (मध्य प्रदेश)
सीनियर फॉरेस्टर पुरस्कार, सना फ़ैयाज़ (अगमुट)
द स्पिरिट ऑफ 1982, प्रथम, कुणाल मिश्रा (छत्तीसगढ़)
द स्पिरिट ऑफ 1982, द्वितीय, आनंद जस्टिन (त्रिपुरा)।
| क्र.सं. | राज्य / कैडर | संख्या |
| 1 | अगमुट (केंद्र शासित) | 13 |
| 2 | मध्य प्रदेश | 11 |
| 3 | राजस्थान | 8 |
| 4 | गुजरात | 7 |
| 5 | जम्मू एवं कश्मीर (अगमुट) | 7 |
| 6 | ओडिशा | 6 |
| 7 | उत्तर प्रदेश | 6 |
| 8 | असम-मेघालय | 5 |
| 9 | छत्तीसगढ़ | 5 |
| 10 | महाराष्ट्र | 5 |
| 11 | तमिलनाडु | 5 |
| 12 | उत्तराखंड | 5 |
| 13 | बिहार | 4 |
| 14 | कर्नाटक | 4 |
| 15 | तेलंगाना | 4 |
| 16 | झारखंड | 4 |
| 17 | अरुणाचल प्रदेश (अगमुट) | 3 |
| 18 | मेघालय | 3 |
| 19 | आंध्र प्रदेश | 2 |
| 20 | भूटान | 2 |
| 21 | हिमाचल प्रदेश | 2 |
| 22 | केरल | 2 |
| 23 | मणिपुर | 2 |
| 24 | पंजाब | 2 |
| 25 | पश्चिम बंगाल | 2 |
| 26 | अंडमान एवं निकोबार द्वीप (अगमुट) | 1 |
| 27 | गोवा (अगमुट) | 1 |
| 28 | दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव (अगमुट) | 1 |
| 29 | हरियाणा | 1 |
| 30 | त्रिपुरा | 1 |