IMA का नया इतिहास: सेना को मिलीं पहली 9 महिला अधिकारी, हरियाणा की शीतल ने ताने मारने वालों को दिया 'कड़क' जवाब
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से पहली बार महिला कैडेटों का बैच पास आउट हुआ, जिसमें नौ युवतियां भारतीय सेना में अधिकारी बनीं। ...और पढ़ें

आइएमए में प्रशिक्षण प्राप्त कर सैन्य अधिकारी बनीं शीतल के कंधे पर सितारे सजाते स्वजन। अनिल डोगरा
HighLights
आईएमए से महिला कैडेटों का पहला बैच पास आउट
नौ युवतियां बनीं भारतीय सेना में अधिकारी
हरियाणा की शीतल व शनन ढाका की प्रेरणादायक कहानी
विजय जोशी, देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) के इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। पहली बार अकादमी से प्रशिक्षित महिला कैडेटों का पहला बैच पास आउट हुआ और नौ युवतियां भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा के पथ पर अग्रसर हो गईं। इनमें हरियाणा के सोनीपत की शीतल व शनन ढाका की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक है।
सोनीपत की शीतल के चेहरे पर पासिंग आउट परेड के बाद गर्व, आत्मविश्वास व उपलब्धि की चमक साफ दिखाई दे रही थी। उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि वह भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होने वाली पहली महिला कैडेटों में शामिल हैं।
इससे भी बड़ी बात यह है कि वह अपने जिले की पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं। शीतल के पिता अशोक कुमार व्यवसायी हैं, जबकि माता मुकेश देवी गृहिणी हैं। परिवार में वर्दी के प्रति लगाव पुराना रहा है।
अशोक कुमार बताते हैं कि उनके पिता पुलिस विभाग में थे और वह स्वयं भी सेना में जाना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। तब उन्होंने अपने बच्चों को सैन्य अधिकारी बनाने का संकल्प लिया।
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जब शीतल ने सेना में अधिकारी बनने की इच्छा जताई तो परिवार ने उसका पूरा साथ दिया। एनडीए की तैयारी के लिए उसने दिन-रात एक कर दिए। रास्ता आसान नहीं था।
स्कूल के दिनों में कई साथी उसे यह कहकर चिढ़ाते थे कि सेना में अधिकारी बनना आसान नहीं है, लेकिन शीतल ने हार नहीं मानी। शीतल ने जवाब दिया, मैं हरियाणा की हूं, एक बार जो ठान लिया तो करके ही दम लेती हूं।
शीतल बताती हैं कि आइएमए का प्रशिक्षण केवल शारीरिक क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां मानसिक मजबूती, नेतृत्व क्षमता व रणनीतिक सोच भी विकसित की जाती है।

बड़े सपने देखो और उन्हें पूरा करने की हिम्मत जुटाओ : शनन ढाका
पहले महिला बैच की एक अन्य कैडेट हरियाणा निवासी शनन ढाका भी अब भारतीय सेना में अधिकारी बन चुकी हैं। उनके पिता भी सेना में रहे हैं और बचपन से ही वह उन्हें देखकर प्रेरित होती थीं।
शनन बताती हैं कि उन्होंने हमेशा अपने पिता की तरह वर्दी पहनने का सपना देखा था, लेकिन कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें भारतीय सैन्य अकादमी के पहले महिला बैच का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सपना बड़ा था, इसलिए मेहनत भी बड़ी करनी पड़ी। आज वही सपना हकीकत बन गया है।