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    जागरण संवादी: विशाखा श्रीवास्तव की 'कैकेयी' ने किया मंत्रमुग्ध, मनोज राजन के सुरों ने बिखेरी किशोर कुमार की यादें

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 07:43 PM (IST)

    दैनिक जागरण के 'संवादी' उत्सव के समापन सत्र में अभिनेत्री विशाखा श्रीवास्तव ने कैकयी के भावों को जीवंत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मनोज राजन त्र ...और पढ़ें

    संवादी के मंच पर कैकैयी के अंतर्द्वंद्व और काल के दर्शन को मंच पर जीवंत करतीं अभिनेत्री विशाखा श्रीवास्तव। जागरण

    संवादी के मंच पर कैकैयी के अंतर्द्वंद्व और काल के दर्शन को मंच पर जीवंत करतीं अभिनेत्री विशाखा श्रीवास्तव। जागरण

    HighLights

    1. विशाखा श्रीवास्तव ने कैकयी के भावों को जीवंत किया

    2. 'मैं चुप रहूंगी...' काव्य प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक किया

    3. मनोज राजन त्रिपाठी ने किशोर कुमार के गीत सुनाए

    अंकुर अग्रवाल, देहरादून। कुछ प्रस्तुतियां मनोरंजन करती हैं, कुछ प्रभावित करती हैं और कुछ ऐसी होती हैं जो दिल की किसी शांत कोठरी में जाकर हमेशा के लिए बस जाती हैं।

    दैनिक जागरण के दो दिवसीय 'संवादी' उत्सव के समापन सत्र में मुंबई से पहुंची 'हमारे राम' सीरियल की अभिनेत्री विशाखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति कुछ ऐसी ही रही।

    मंच पर जैसे ही उन्होंने कदम रखा, सभागार में मौजूद सैकड़ों लोगों ने महसूस किया कि अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कला और संवेदनाओं का उत्सव शुरू होने जा रहा है। संवादी की इस शाम में शब्द थे, सुर थे, भाव थे... लेकिन सबसे अधिक थी कला की वह आत्मा, जिसे विशाखा ने मंच पर जीवंत कर दिया।

    दो दिनों तक विचारों, विमर्शों, साहित्य, समाज व संस्कृति के रंगों से सजा 'संवादी' अपने अंतिम पड़ाव पर था। माहौल में हल्की थकान भी थी और उत्सुकता भी। तभी मंच पर आईं विशाखा श्रीवास्तव।

    कुछ ही क्षणों में उनकी आवाज, उनकी अभिव्यक्ति व मंचीय उपस्थिति ने पूरे सभागार को अपने आगोश में ले लिया। यह केवल गायन नहीं था, केवल अभिनय भी नहीं था। यह उन दुर्लभ प्रस्तुतियों में से एक थी, जहां कलाकार अपनी कला से आगे निकलकर स्वयं एक अनुभव बन जाता है।

    विशाखा की प्रस्तुति में भावों का पूरा इंद्रधनुष मौजूद था। दर्शकों के चेहरे बदलते भावों का आईना बने हुए थे। कोई मुस्कुरा रहा था, कोई स्मृतियों में खो गया था और कोई उनकी प्रस्तुति को मोबाइल के कैमरे में कैद करने में व्यस्त था।

    'मैं चुप रहूंगी...' और सभागार में छा गई खामोशी

    विशाखा के मुख से कैकयी और काल के संवाद ने श्रोताओं को आत्ममंथन को मजबूर कर दिया। जब उन्होंने 'मैं चुप रहूंगी...' शीर्षक से कैकयी और काल के बीच संवादात्मक काव्य प्रस्तुति दी। मंच पर शब्दों का ऐसा संसार सजा कि पूरा सभागार ही मौन हो गया।

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    रामायण के सबसे विवादित पात्रों में गिनी जाने वाली कैकेयी के मन की पीड़ा, पश्चाताप, प्रश्न व तर्क जब विशाखा की आवाज में आकार लेने लगे तो श्रोता एक-एक शब्द को आत्मसात करते नजर आए।

    दूसरी ओर काल के रूप में जीवन, नियति और समय की अनिवार्यता का दर्शन भी संवादों में गूंजता रहा। विशाखा ने अपनी सशक्त वाणी और अभिनय कौशल से कैकेयी को केवल रामायण का पात्र नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक ऐसी स्त्री के रूप में प्रस्तुत किया जो इतिहास के फैसलों, समाज की धारणाओं और अपने अंतर्द्वंद्व के बीच खड़ी है।

    वहीं, काल के संवादों ने जीवन की क्षणभंगुरता और समय की अपरिहार्यता को बेहद प्रभावी ढंग से सामने रखा।

    रंगमंच की कैकेयी, जिसने देशभर में बनाई पहचान

    विशाखा श्रीवास्तव का कलात्मक सफर वर्षों की साधना का परिणाम है। उन्होंने देशभर में चर्चित हुए भव्य नाट्य मंचन 'हमारे राम' में कैकेयी का किरदार निभाकर दर्शकों व समीक्षकों दोनों का ध्यान खींचा।

    रामायण के सबसे जटिल और बहुआयामी पात्रों में गिनी जाने वाली कैकेयी को उन्होंने जिस संवेदनशीलता और गहराई से मंच पर उतारा, उसने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी अभिनय यात्रा 'खिलजी का दांत', 'करवट', 'काली शलवार' व 'हम तो ऐसे ही हैं' जैसे चर्चित नाटकों से होकर गुजरी है।

    मनोज राजन त्रिपाठी की सुरलहरी ने बांधा समां

    समापन अवसर पर प्रसिद्ध उपन्यासकार और साहित्यकार मनोज राजन त्रिपाठी ने अपनी गायिकी से श्रोताओं को पुराने दौर की मधुर यादों में पहुंचा दिया।

    साहित्य और संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हुए उन्होंने हिंदी सिनेमा के महान गायक किशोर कुमार के लोकप्रिय गीत 'घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं मैं' और 'प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है' समेत कई सदाबहार गीत सुनाए। जैसे ही मनोज राजन त्रिपाठी ने सुर छेड़े, सभागार तालियों से गूंज उठा।

    उनकी सधी हुई आवाज और गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई श्रोता गीतों के साथ गुनगुनाते नजर आए तो कई पुरानी यादों में खो गए।

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