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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 09, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    कालिका मंदिर में ध्वजारोहण महोत्सव शुरू, शक्ति अर्जित करने को चिंतन पर जोर

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    Updated: Wed, 10 Apr 2019 11:42 AM (IST)

    भवन श्री कालिका मंदिर के 66वें ध्वजारोहण महोत्सव के तहत शक्ति सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इसमें देश के विभिन्न शहरों से आए संतों ने शक्ति तत्व पर अपने विच ...और पढ़ें

    कालिका मंदिर में ध्वजारोहण महोत्सव शुरू, शक्ति अर्जित करने को चिंतन पर जोर
    कालिका मंदिर में ध्वजारोहण महोत्सव शुरू, शक्ति अर्जित करने को चिंतन पर जोर

    देहरादून, जेएनएन। भवन श्री कालिका मंदिर के 66वें ध्वजारोहण महोत्सव के तहत तीन दिवसीय शक्ति सम्मेलन का शुभारंभ हो गया। इसमें देश के विभिन्न शहरों से आए संतों ने शक्ति तत्व पर अपने विचार रखे। 

    अंसारी मार्ग स्थित प्राचीन कालिका मंदिर में दिल्ली से आए महामंडलेश्वर स्वामी अनुभूतानंद महाराज ने कहा कि शक्ति का एक स्वरूप उर्जा भी है जो निरंतर प्रवाहित होकर मानव का कल्याण करती है। गुजरात से आए संत सर्वेश बापू ने कहा कि संत शब्द रूप नहीं है, उनकी महिमा का गुणगान ब्रह्मा, विष्णु, महेश कवि व कोविद भी नहीं कर सकते। 

    दिल्ली से आए स्वामी रामानंद महाराज ने कहा कि शक्ति अर्जित करने के लिए मानव को चिंतन करना होगा। ठाकुर श्री कृष्ण का कथन है कि जो मेरा चिंतन करते हैं मैं उन भक्तों को भयमुक्त कर देता हूं। उनकी सारी व्यवस्था का मैं स्वयं वहन करता हूं शक्ति सभी प्राणियों में विद्यमान है। 

    करनाल से आए स्वामी परमानंद महाराज ने कहा कि देहरादून क्षेत्र में नित्य लीला में लीन बालयोगी श्री सर्वदास जी महाराज ने जो सत्संग रूपी बगीचा लगाया है। इसके फूलों की सुगंध भारतवर्ष के साथ विदेशों में भी फैल रही है।

    स्वामी राम तीर्थ के स्वामी काका हरि ओम महाराज ने कहा कि शक्ति के रूप की व्याख्या संत जनों के माध्यम से ही संभव है। देहरादून के स्वामी शिव चंद्र महाराजन ने भी शक्ति रूप की व्याख्या की। मंदिर में नवरात्र का पूजन भी हुआ। 

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    मंदिर समिति के प्रतीक मैनी ने बताया कि महोत्सव में गुरमीत सिंह रागी गुरु वाणी का कीर्तन करेंगे। इस दौरान गगन सेठी, रमेश साहनी, एलडी भाटिया, दयाल धवन साहिब राम डोरा, उमेश मिनोचा, सतीश कक्कड़, एनके दत्ता आदि मौजूद रहे।

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