केदारनाथ धाम को मिलेगी निर्बाध बिजली, 16 करोड़ की एक्सप्रेस फीडर लाइन को मंजूरी
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने केदारनाथ धाम के लिए रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग तक 50 किलोमीटर लंबी 33 केवी एक्सप्रेस फीडर लाइन को मंजूरी दी है। यह 16 क ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
रुद्रप्रयाग-सोनप्रयाग 50 किमी एक्सप्रेस फीडर लाइन को मंजूरी मिली।
केदारनाथ धाम को मिलेगी निर्बाध और बेहतर बिजली आपूर्ति।
16 करोड़ की परियोजना से भविष्य की बिजली मांग पूरी होगी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। केदारनाथ धाम, सोनप्रयाग और पूरे यात्रा मार्ग की बिजली व्यवस्था को अधिक सशक्त करने के लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग तक 50 किलोमीटर लंबी नई 33 केवी एक्सप्रेस फीडर लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
करीब 16 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से यात्रा सीजन में निर्बाध बिजली आपूर्ति, बेहतर वोल्टेज, कम ट्रिपिंग और भविष्य में बढ़ने वाले बिजली भार को संभालने में मदद मिलेगी।
आयोग ने परियोजना की उपयोगिता स्वीकार कर यूपीसीएल को बिना पूर्व नियामकीय अनुमति टेंडर जारी करने पर नाराजगी भी जताई।
आदेश के अनुसार वर्तमान में सोनप्रयाग उपकेंद्र तक बिजली श्रीनगर-रुद्रप्रयाग-तिलवाड़ा-अगस्त्यमुनि-ऊखीमठ-गुप्तकाशी होते हुए पहुंचती है। कई उपकेंद्रों से होकर गुजरने के कारण वोल्टेज ड्राप, लाइन लास और बिजली बाधित होने की समस्या रहती है। नई एक्सप्रेस फीडर लाइन सीधे रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग तक जाएगी, जिससे बीच के चार उपकेंद्र बायपास हो जाएंगे और बिजली आपूर्ति अधिक भरोसेमंद होगी।
वैकल्पिक आपूर्ति उपलब्ध रहेगी
आयोग ने माना कि यह परियोजना केवल वर्तमान जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि केदारनाथ मास्टर प्लान, प्रस्तावित रोपवे परियोजना, पर्यटन गतिविधियों और भविष्य की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए भी अत्यंत आवश्यक है। आयोग के अनुसार इससे किसी एक लाइन में खराबी आने पर भी वैकल्पिक आपूर्ति उपलब्ध रहेगी।
30 प्रतिशत राज्य सरकार इक्विटी के रूप में देगी
परियोजना का वित्तपोषण केंद्र सरकार की स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फार कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत किया जाएगा। इसमें 70 प्रतिशत राशि केवल एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण के रूप में मिलेगी, जबकि 30 प्रतिशत राज्य सरकार इक्विटी के रूप में देगी। आयोग ने माना कि कम ब्याज वाली यह व्यवस्था भविष्य में उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को भी कम करेगी।
खबरें और भी
22 फरवरी, 2025 को परियोजना का टेंडर जारी कर दिया
सुनवाई के दौरान आयोग ने यूपीसीएल की याचिका और डीपीआर में लिपिकीय त्रुटियां दूर करने को कहा। आयोग ने कहा कि यूपीसीएल ने 22 फरवरी, 2025 को परियोजना का टेंडर जारी कर दिया, जबकि नियामकीय मंजूरी के लिए याचिका लगभग छह महीने बाद दाखिल की गई।
आयोग ने कहा कि नियमों के अनुसार पहले नियामक आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य है। हालांकि केदारनाथ धाम जैसे संवेदनशील धार्मिक क्षेत्र में निर्बाध बिजली व्यवस्था के महत्व को देखते हुए इस मामले में विशेष परिस्थिति मानते हुए परियोजना को पोस्ट-फैक्टो मंजूरी दी गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति होने पर प्रस्ताव खारिज करने के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।