महाराष्ट्र के किसान आंदोलन... फंसी खेप, कहीं पड़ न जाएं प्याज के लाले
महाराष्ट्र में किसानों के उग्र आंदोलन के कारण प्याज की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें भी बढ़ गई हैं।


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जागरण संवाददाता, देहरादून । प्याज की महंगाई को नियंत्रित करने व बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र से दून पहुंचने वाली खेप किसान आंदोलन में फंस गई है। महाराष्ट्र में किसानों के उग्र आंदोलन व चक्का जाम से यातायात व्यवस्था ठप हो गई है। हालांकि, मंडी व नाफेड के अधिकारी दून में प्याज की आवक पहुंचने के लिए जुटे हैं।
महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक बेल्ट नासिक व छत्रपति संभाजीनगर में किसानों के उग्र आंदोलन के कारण दून आने वाली प्याज की खेप फंस गई है। ताजा स्थिति में महाराष्ट्र में परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है।
नेशनल एग्रीकल्चरल कोआपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (नाफेड) के उत्तराखंड प्रमुख अनिमेष शुक्ला ने बताया कि पहले खेप के निरंजनपुर स्थित नवीन सब्जी मंडी में 8 व 9 सितंबर तक पहुंचने की संभावना थी, लेकिन इसी बीच किसानों के उग्र आंदोलन व चक्का जाम से प्याज बेल्ट में यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई। इससे प्याज की खेप देहरादून तक नहीं पहुंच सकी है।
गुरुवार को दोपहर बाद नाफेड के गोदाम से ट्रक लोडिंग होकर देहरादून के लिए निकल गए हैं। संभवत: रविवार शाम तक देहरादून प्याज की खेप पहुंच जाएगी। बता दें कि गुरुवार को निरंजनपुर स्थित नवीन सब्जी मंडी में थाेक भाव में 35 से 45 व फुटकर बाजारों में 50 से 65 रुपये प्रतिकिलोग्राम तक प्याज की लाेगों ने खरीदारी की।
आंदाेलन के कारण देशभर में आवक हुए प्रभावित
महाराष्ट्र का नासिक व संभाजीनगर प्याज बेल्ट के नाम से प्रसिद्ध है। इसमें भी नासिक के लासलगांव और पिपलगांव भारत में प्याज उत्पादन और व्यापार के दो सबसे बड़े केंद्र हैं।. लासलगांव व पिपलगांव कृषि उपज मंडियों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। नाफेड के गोदाम भी यहां स्थित है। वर्तमान में गोदामों पर करीब 150 ट्रक की लोडिंग वेटिंग में है। ताजा स्थित में यहां से 14-15 ट्रकों की लोडिंग हो पा रही है।
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थोक मंडी में प्याज के दाम गिरने से किसान उग्र
खेप फंसने और आंदोलन का मुख्य कारण प्याज की कीमतों में आई भारी गिरावट है। महाराष्ट्र में प्याज की साठा फसल के थोक मंडियों में आने से प्याज के दाम गिरकर 2 से 6 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि किसानों की ओर से फसल उत्पादन पर 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम की लागत आने के दावे किए जा रहे हैं। इससे नाराज किसान आंदोलन कर रहे हैं।
