उत्तराखंड: मनेरी भाली सुरंग में 48 घंटे चला सोनार सर्वे, अब सामने आएगा रिसाव का सच
उत्तराखंड की मनेरी भाली फेज-2 जलविद्युत परियोजना की हेड रेस टनल में जल रिसाव की गुत्थी सुलझाने के लिए 48 घंटे का सोनार सर्वे किया गया। यह सर्वे रिसाव ...और पढ़ें

मनेरी टलन।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। 304 मेगावाट क्षमता वाली मनेरी भाली फेज-2 जलविद्युत परियोजना की हेड रेस टनल में लंबे समय से जारी जल रिसाव की गुत्थी सुलझाने के लिए 48 घंटे तक सोनार तरंग आधारित सर्वे किया गया।
सर्वे रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि सुरंग में लीकेज का साइज कितना है, मरम्मत के लिए सुरंग कितने महीने बंद रहेगी और मरम्मत का तरीका क्या होगा।
फिलहाल सुरंग से करीब 1,500 लीटर प्रति सेकंड पानी का रिसाव जारी है। इस रिसाव से परियोजना के साथ ही आसपास की भूमि व ढलानों पर भी खतरा बना हुआ है। इससे बिजली उत्पादन प्रभावित है और परियोजना की निगरानी बढ़ा दी गई है।
इसे पूर्व भी रिमोटली आपरेटेड व्हीकल के जरिए सुरंग के भीतर जांच की गई थी। रिसाव को ग्राउटिंग (सीमेंट-केमिकल इंजेक्शन) से बंद करने की कोशिश हुई थी। लेकिन रिसाव पूरी तरह नहीं रुका, जिससे नई तकनीकी जांच की जरूरत पड़ी। अब सोनार सर्वे से रिसाव के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
सोनार सर्वे में प्रयुक्त तकनीक
- ध्वनि तरंगों से स्कैनिंग:- पानी के भीतर हाई-फ्रीक्वेंसी सोनार तरंगें छोड़ी जाती हैं। ये तरंगें सुरंग की दीवारों, दरारों और खोखले हिस्सों से टकराकर वापस लौटती हैं।
- 3डी मैपिंग- वापस लौटती तरंगों से सुरंग की आंतरिक संरचना का थ्री-डायमेंशनल माडल बनता है। इससे पता चलता है कि दरारें सतही हैं या गहरी।
- रिसाव की पहचान:- सर्वे से यह साफ होगा कि पानी किस लेयर (राक फार्मेशन) से अंदर आ रहा है। इससे चट्टान की कमजोरी, फाल्ट जोन और भूजल के दबाव की जानकारी मिलेगी। इससे ही मरम्मत की तकनीक तय की जाएगी। रिपोर्ट से तय होगा कि केवल ग्राउटिंग पर्याप्त है, या स्टील लाइनिंग, कंक्रीट री-लाइनिंग या प्रेशर-रिलीफ ड्रेनेज सिस्टम लगाना पड़ेगा।
सुरंग कितने महीने बंद रहेगी
सटीक समय सोनार रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, लेकिन विशेषज्ञों का प्रारंभिक आकलन है कि अगर रिसाव सीमित दरारों से है तो यह 3 से 6 महीने तक बंद रह सकती है।
अगर संरचनात्मक कमजोरी मिली तो 6 से 9 महीने और अगर बड़े फाल्ट जोन का पता चला तो 9 से 12 महीने तक भी काम चल सकता है, लेकिन उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की कोशिश है कि सुरंग को बंद किए बिना ही मरम्मत का कार्य किया जाए।
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‘उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड सुरंग को बंद किए बिना ही मरम्मत कार्य करने का रास्ता तलाश रही है, सोनार सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।’
--एके सिंह, निदेशक आपरेशन, यूजेवीएन लिमिटेड