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    पौड़ी गढ़वाल में मानसून से पहले प्रशासन हाई अलर्ट, नयार नदी को मिलेगा नया जीवन

    Updated: Tue, 30 Jun 2026 04:33 PM (GMT+05:30)

    पौड़ी गढ़वाल में मानसून से पहले आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सक्रिय किया गया है, जिसमें प्रभारी सचिव ने तैयारियों की समीक्षा की। नयार नदी पुनर्जीवन परियोज ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

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    HighLights

    1. आपदा प्रबंधन व्यवस्था सक्रिय, मानसून तैयारियों की समीक्षा।

    2. नयार नदी पुनर्जीवन परियोजना को गति देने के निर्देश।

    3. दूरस्थ क्षेत्रों में सैटेलाइट फोन, ड्रोन व्यवस्था तैयार।

    जागरण संवाददाता, पौडी गढ़वाल: मानसून को देखते हुए जनपद में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने और नयार नदी के पुनर्जीवन को गति देने के लिए सोमवार को अहम फैसले लिए गए। जिला मुख्यालय पौड़ी के प्रभारी सचिव दिलीप जावलकर ने जिला आपदा परिचालन केंद्र का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव तैयारियों की समीक्षा की, जबकि कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठकों में विभागवार मानसून तैयारियों, विकास योजनाओं और नयार नदी पुनर्जीवन परियोजना की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया।

    उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभाग पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करें। राहत एवं बचाव कार्यों में संसाधनों की किसी भी स्तर पर कमी नहीं होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान कंट्रोल रूम, शिकायत निवारण कक्ष, खोज एवं बचाव उपकरणों, स्टोर और ड्रोन व्यवस्था का जायजा लिया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि जिले में 19 सैटेलाइट फोन सक्रिय हैं, जबकि दूरस्थ और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों को 60 जियो-स्टेशनरी सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए हैं। नाइट विजन और मिनी ड्रोन भी आपदा प्रबंधन के लिए तैयार हैं।

    प्रभारी सचिव ने गुमखाल-सतपुली मार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस बढ़ाने, नव निर्वाचित ग्राम प्रधानों और स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण देने तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सचेत एप के व्यापक उपयोग, नियमित मॉक ड्रिल और इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आइआरएस) के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।

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    इसी दौरान जल स्रोत एवं नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण (सारा) की बैठक में नयार नदी पुनर्जीवन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा करते हुए उन्होंने इसे एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नयार घाटी की जल सुरक्षा, सिंचाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नदी और उससे जुड़े जल स्रोतों का संरक्षण बेहद जरूरी है।

    बैठक में पालकोट एडवेंचर पार्क, डॉ. भीमराव आंबेडकर जिला विज्ञान संग्रहालय, नयार घाटी फेस्टिवल, हेरिटेज म्यूजियम और मोहनचट्टी आयुर्वेदिक विलेज समेत विभिन्न विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

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