Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ...और कुछ इस तरह धाकड़ से धुरंधर बनते चले गए धामी

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 07:59 AM (IST)

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने पांच साल पूरे किए, जहां उन्होंने कई कड़े और दूरगामी फैसले लिए। ...और पढ़ें

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लोकतंत्र की विकास यात्रा में ऐसे तो पांच साल की अवधि कोई बहुत मायने नहीं रखती है, लेकिन जब इसी अवधि को किसी देश या काल के संदर्भ में देखा जाता है तो फिर कई कसौटियां सामने आ जाती हैं। उन कसौटियों पर बहुत कुछ रखा और परखा जाता है। क्या खोया और क्या पाया जैसे प्रश्न भी उठ खड़े होते हैं।

    किरदारों की भूमिकाओं का मूल्यांकन होता है और सामने आईना भी रखा जाता है। उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी आज शनिवार को बतौर मुख्यमंत्री अपने पांच साल पूरा कर रहे हैं। आइए, हम समय की इस कसौटी पर उत्तराखंड के संदर्भ में धामी नामक किरदार को रखकर उनकी परख करते हैं।

    ठीक पांच साल पहले की स्मृति को ताजा करें तो क्षणिक ही सही, उत्तराखंड के साथ-साथ खुद सत्तारूढ़ भाजपा में राजनीतिक उथल-पुथल जैसा माहौल था। छह माह के अंतराल में दो मुख्यमंत्री बदल दिए गए थे और कुछ महीने बाद सामने विधानसभा का चुनाव था।

     युवा पुष्कर सिंह धामी पर लगाया दांव 

    पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने ऊहापोह से ऊपर उठकर युवा पुष्कर सिंह धामी जैसे एक लो-प्रोफाइल नेता पर दांव लगा दिया। नेतृत्व के इस फैसले ने सियासी पंडितों को चौंकाया। कुछ ने इसे केंद्रीय नेतृत्व का जल्दबाजी भरा फैसला बताया तो कुछ को उनके सियासी अनुभव पर संशय था।

    खबरें और भी

    दूसरी ओर, युवा मोर्चा के कामकाज में तपे-तपाए धामी मानो इसी मौके की प्रतीक्षा में थे। कमान संभालते ही उनके तेवरों और कार्यशैली ने यह बता दिया कि केंद्रीय नेतृत्व ने कोई हल्का दांव नहीं खेला है। धामी ने 2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान पुरजोर तरीके से ऐलान किया कि भाजपा की नई सरकार बनते ही देश में समान नागरिक संहिता लाने वाला पहला राज्य उत्तराखंड बनेगा।

    डंके की चोट पर प्रदेश में लागू किया यूसीसी 

    चुनाव के बाद उनकी अगुआई में गठित सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही इसका प्रस्ताव पास कर तैयारियां शुरू कर दी गईं। आखिरकार धामी वादे पर खरे उतरे और डंके की चोट पर प्रदेश में यूसीसी लागू कर दिखाया।

    फिर तो धामी रुके नहीं और एक के बाद एक कड़े और दूरगामी फैसलों ने पूरे देश का ध्यान उत्तराखंड की ओर खींचा। नकलरोधी कानून, सख्त भू-कानून, धर्म की आड़ में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोधी कानून, मतांतरण रोधी कानून आदि ने खूब सुर्खियां बटोरीं।

    उत्तराखंड के यूसीसी माडल से प्रेरणा लेकर तो कई अन्य राज्यों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश में कभी भर्ती परीक्षाओं की स्थिति डांवाडोल थी। पर्चा लीक बड़ी समस्या थी। धामी ने कड़ा कानून बनाकर इस पर नकेल डाल दी।

    इतना ही नहीं, पिछले पांच साल में प्रदेश में 34 हजार युवाओं को सरकारी नौकरियां भी दी गईं। इसी प्रकार उद्योग के मोर्चे पर प्रदेश की धीमी रफ्तार को धामी ने ऐड़ लगाई और बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश कराने में सफलता पाई।

    पीएम मोदी और अमित शाह थपथपा चुके हैं पीठ

    आज प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की ग्राउंडिंग हो चुकी है। बीते तीन सालों में प्रदेश की 12 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि को धर्म की आड़ में किए गए अतिक्रमण के कब्जा से मुक्त कराया जा चुका है। अभी हाल ही में धामी सरकार ने एक राष्ट्र एक शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रदेश में अल्पसंख्यक समाज के बेतरतीब और कुप्रबंधन के शिकार शिक्षण संस्थाओं को व्यवस्थित करते हुए उन्हें पटरी पर ला खड़ा किया है। इन तमाम फैसलों या उपलब्धियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक कई बार धामी की पीठ थपथपा चुके हैं।

    अपने कड़े फैसलों को लेकर पहले उन्हें धाकड़ धामी कहा जाता था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले दिनों उन्हें धुरंधर विशेषण से भी नवाजा। शांत और हंसमुख दिखने वाले धामी ने दिखाया कि उनके अंदर न सिर्फ एक सख्त प्रशासक बैठा है, बल्कि उनमें विकसित उत्तराखंड को लेकर एक तड़प और समर्पण भी है। शायद यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड में भाजपा सरकार की हैटट्रिक लगाने का मिशन धामी के हाथों में ही सौंप दिया है।

    यह भी पढ़ें- CM पुष्कर सिंह धामी की सख्त चेतावनी, विकास परियोजनाओं में हुई देरी तो नपेंगे अधिकारी

    यह भी पढ़ें- मुख्यमंत्रियों का दिल भी कभी-कभार हो जाता है बच्चा जी, योगी आदित्यनाथ व पुष्कर सिंह धामी ने की कसरत

    image

    मनोज झा, राज्य संपादक, उत्तराखंड