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    ऋषिकेश में राफ्टिंग का नया नियम: पर्यटकों की सुरक्षा के लिए फेरों की संख्या सीमित

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 11:09 PM (IST)

    ऋषिकेश में पर्यटकों की सुरक्षा के लिए राफ्टिंग के नए नियम लागू होंगे। अब लंबे रूट (मरीन ड्राइव, शिवपुरी) पर एक राफ्ट अधिकतम तीन फेरे ही लगा सकेगी, जबक ...और पढ़ें

    मरीन ड्राइव-खारास्रोत के बीच राफ्टिंग का आनंद लेते पर्यटक। जागरण आर्काइव

    मरीन ड्राइव-खारास्रोत के बीच राफ्टिंग का आनंद लेते पर्यटक। जागरण आर्काइव 

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    जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। देशभर में राफ्टिंग के लिए विख्यात ऋषिकेश में पर्यटन विभाग पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर राफ्टिंग संचालन में नया नियम लागू करने जा रहा है।

    ई व्यवस्था के तहत अब टिहरी जिले के मरीन ड्राइव व शिवपुरी से संचालित होने वाली राफ्ट एक दिन में तीन से अधिक फेरे नहीं लगा सकेंगी।

    हालांकि, छोटे रूट पर फेरे की अधिकतम संख्या चार तय की गई हैं। यह नई व्यवस्था अगले सप्ताह से लागू होगी।

    ऋषिकेश में राफ्टिंग का बढ़ रहा क्रेज लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अधिक मुनाफा कमाने की चाह में कई राफ्टिंग गाइड व कंपनियां एक राफ्ट से चार से पांच फेरे लगाने का प्रयास करते हैं।

    जिससे अंतिम फेरे की राफ्टिंग शाम ढलने के दौरान भी संचालित की जाती है, जो कि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा सकता है।

    वहीं, राफ्टिंग के अंतिम फेरों में गाइड थकावट भी महसूस करते हैं। इससे रैपिड में राफ्ट पलटने या अन्य आपात स्थिति में कई बार गाइड बड़ा रेस्क्यू करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं, जिससे राफ्टिंग दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है।

    • पिछले तीन वर्षों में ऋषिकेश में गंगा राफ्टिंग के दौरान कई दुर्घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

    इन दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए अब पर्यटन विभाग के अधीन राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान ने अधिक लंबे रूट पर राफ्ट संचालन में फेरों की संख्या अधिकतम तीन निर्धारित करने का निर्णय लिया है।

    अब इसे लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अगले सप्ताह से नई व्यवस्था को पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा।

    यह होगी नई व्यवस्था

    राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी जसपाल चौहान के अनुसार, ऋषिकेश में राफ्टिंग का सबसे लंबा रूट मरीन ड्राइव-खारास्रोत (24 किलोमीटर) है, जिसे पूरा करने में औसतन साढ़े 3 घंटे का समय लगता है।

    जबकि, दूसरा लंबा रूट शिवपुरी-खारास्रोत (18 किलोमीटर) है, जिसमें करीब ढाई घंटे लगते हैं।

    इन दो सर्वाधिक लंबे रूटों पर ही तीन फेरे का नियम लागू रहेगा। इनके अलावा ब्रह्मपुरी-खारास्रोत व अन्य छोटे रूटों पर अधिकतम चार फेरे लगाए जा सकेंगे।

    वहीं, नई व्यवस्था के तहत राफ्टिंग एवं साहसिक खेल विभाग द्वारा मरीन ड्राइव, शिवपुरी, ब्रह्मपुरी में स्थित विभागीय राफ्टिंग केंद्र में प्रत्येक राफ्ट का रिकार्ड दर्ज किया जाएगा।

    लंबे व अन्य रूटों पर अधिकतम फेरे पूरे होने के बाद राफ्ट को गंगा में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा।

    विभाग द्वारा अगले सप्ताह से लागू हो रही यह व्यवस्था में शुरुआती समय में आफलाइन मोड पर संचालित होगी, लेकिन विभाग अब सभी केंद्रों में राफ्टों के फेरों की प्रभावी निगरानी व अनियमितताएं रोकने के लिए साफ्टवेयर प्रणाली विकसित करने में जुट गया है।

    पुलिस प्रशासन व पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से गंगा रिवर राफ्टिंग में नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत लंबे रूट पर एक राफ्ट अधिकतम तीन व सामान्य रूटों पर चार फेरे ही लगा सकेंगी। इस नई व्यवस्था के बारे में पूर्व में ही राफ्टिंग एसोसिएशन व कंपनी स्वामियों को जानकारी दी जा चुकी है। राफ्टिंग केंद्रों में राफ्टिंग फेरों की निगरानी फिलहाल आफलाइन होगी, लेकिन बहुत जल्द आनलाइन मोड पर निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पर्यटकों की सुरक्षा व राफ्टों का सुव्यवस्थित संचालन करना है।

    जसपाल चौहान, राफ्टिंग एवं साहसिक खेल अधिकारी (मुनिकीरेती)।

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