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    700 टन लोहा पहुंचा देहरादून लेकिन काम अटका, 60 LPG सिलिंडरों ने बढ़ाई भंडारी बाग आरओबी की राह

    Updated: Mon, 11 May 2026 05:31 PM (IST)

    देहरादून के भंडारी बाग रेलवे ओवर ब्रिज परियोजना में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति न होने से देरी हो रही है। ...और पढ़ें

    निर्माणाधीन भंडारी बाग रेलवे ओवरब्रिज।

    निर्माणाधीन भंडारी बाग रेलवे ओवरब्रिज।

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    सुमन सेमवाल, देहरादून। भंडारी बाग रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) परियोजना पर इंतजार बढ़ता जा रहा है। गंभीर यह कि जिस रेलवे ट्रैक को ऊपर से आरपार करने का दारोमदार लोहे के पुल पर टिका है, उसे जोड़ने में पसीने छूट रहे हैं।

    लोहे के पुल के करीब 700 टन के पार्ट देहरादून पहुंच चुके हैं, मगर उन्हें असेंबल करने के लिए 60 एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति डेढ़ महीने बाद भी नहीं हो पाई है।

    तमाम जतन के बाद पूर्ति विभाग ने सिलिंडरों की आपूर्ति करने को सहमति पत्र जारी किया है, मगर हफ्तेभर से यह पत्र भी व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है।

    आरओबी परियोजना में लोहे के हिस्सों को असेंबल करने के लिए एलपीजी सिलिंडरों की जरूरत बताते हुए निर्माण कंपनी लीशा इंजीनियर्स लि. ने 60 सिलिंडरों की मांग की थी।

    उस समय ईरान और इजराइल के बीच युद्ध चरम पर होने के चलते एलपीजी संकट गहराया था और किसी ने भी पत्र पर ध्यान नहीं दिया।

    अब जब हालात सामान्य हो रहे हैं, तब भी पूर्ति विभाग की सुस्ती दूर होने का नाम नहीं ले रही। जिस कारण निर्माण में निरंतर विलंब हो रहा है और डेडलाइन के अनुरूप काम पूरा करने की उम्मीद भी धुंधली हो रही है।

    निर्माण कंपनी ने जब रिमाइंडर और कई बार व्यक्तिगत आधार पर मिन्नत की, तब जाकर अब पत्र जारी किया गया है। यह बात और है कि साइट पर अभी भी सिलिंडरों का इंतजार बरकरार है।

    रेलवे के इंजीनियरों ने शुरू किया आकलन

    रेलवे ट्रैक के ऊपर 76 मीटर लंबे लोहे के पुल के निर्माण के लिए ढांचों को असेंबल करने में एक माह का समय लग जाएगा। यह समय सिलिंडरों की आपूर्ति और काम शुरू किए जाने के बाद गिना जाएगा।

    हालांकि, रेलवे की संबंधित इकाई ने अपना काम शुरू कर दिया है। रेलवे के इंजीनियर लोहे के पुल को लांच करने की योजना के पहले परियोजना के मौजूदा ढांचों का बारीकी से आकलन कर रहे हैं। लांचिंग को जीरो एरर बनाने के लिए सभी तरह की गणना की जा रही है।

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    इसके बाद ही कार्यदायी संस्था लोनिवि और निर्माण कंपनी लीशा को लांचिंग की अनुमति दी जाएगी। साथ ही इसके बाद अधिकारी निर्माण के दौरान रेलवे के ब्लाक के लिए भी आवेदन कर सकेंगे।

    परियोजना पर एक नजर

    • लंबाई, करीब 578 मीटर
    • लागत, 43 करोड़ रुपये (यूटिलिटी शफ्टिंग सहित)
    • मूल लागत, 33.62 करोड़ रुपये
    • यूटिलिटी शिफ्टिंग, 10 करोड़ रुपये
    • अब तक खर्च, 17 करोड़ रुपये
    • शेष बची राशि, 16 करोड़ रुपये
    • बढ़ी लागत, 12.5 करोड़ रुपये

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