जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त पर ‘बाल गोपाल’ की चाहत, निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा ऑपरेशन से
उत्तराखंड में सीजेरियन प्रसव की दर तेजी से बढ़ रही है, निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा ऑपरेशन से जन्म ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। बच्चे के जन्म का पल कभी प्रकृति के भरोसे होता था, अब पहले से तारीख तय हो रही हैं, तो कहीं शुभ घड़ी का इंतजार। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण से अपने बच्चे के जन्मदिन को जोड़ने की चाहत इसका नया उदाहरण है।
हल्द्वानी में 12 परिवारों ने जन्माष्टमी के शुभ मुहूर्त में प्रसव कराने की इच्छा जताई, जबकि देहरादून के निजी अस्पतालों में 20 से अधिक परिवारों ने आपरेशन के जरिये शुभ संयोग में बच्चे के जन्म का अनुरोध किया।
मुहूर्त की चाह सीजेरियन रेट बढ़ने का अकेला कारण नहीं है, लेकिन राज्य में आपरेशन से प्रसव की लगातार बढ़ती दर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल जरूर खड़ा करती है।
एक दशक में सीजेरियन प्रसव की दर दोगुनी
निजी अस्पतालों में बच्चों के जन्म के लिए होने वाले सीजेरियन आपरेशन की दर सरकारी अस्पतालों की तुलना में तीन गुने से अधिक है।
यह भी पढ़ें- बिहार में सुरक्षित मातृत्व की ओर बड़ा कदम, अस्पताल पहुंच रहीं अधिक गर्भवती; संस्थागत प्रसव बढ़कर 81.1 प्रतिशत
राज्य के निजी अस्पतालों में होने वाले प्रसव में 47.7 प्रतिशत सीजेरियन हो रहे हैं, यानी कि निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव सीजेरियन से हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह दर 14.7 प्रतिशत है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में एक दशक में सीजेरियन प्रसव की दर लगभग दोगुनी हो चुकी है।
सरकारी अस्पतालों की घटी साख
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट के अनुसार 83.2 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हुए थे, जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में बढ़कर 88.9 प्रतिशत हो गए, लेकिन सरकारी संस्थानों में होने वाले प्रसव का हिस्सा 53.3 प्रतिशत से घटकर 49.9 प्रतिशत रह गया। यानी अस्पतालों में प्रसव की पहुंच तो बढ़ी लेकिन निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी बढ़ गई है।
उत्तराखंड में सीजेरियन प्रसव
- मापदंड - स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 - स्वास्थ्य सर्वेक्षण 6
- कुल सीजेरियन प्रसव - 20.4 प्रतिशत - 25.9 प्रतिशत
- निजी स्वास्थ्य संस्थान -43.3 प्रतिशत - 47.7 प्रतिशत
- सरकारी अस्पताल- 14.0 प्रतिशत -14.7 प्रतिशत
प्रसव की स्थिति
- संस्थागत प्रसव - 83.2 प्रतिशत -88.9 प्रतिशत
- सरकारी अस्पतालों में प्रसव - 53.3 प्रतिशत -49.9 प्रतिशत
सीजेरियन ट्रेंड
- स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 - 13.1 प्रतिशत
- स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 - 20.4 प्रतिशत
- स्वास्थ्य सर्वेक्षण 6 - 25.9 प्रतिशत
जिलों में सीजेरियन प्रसव का प्रतिशत
- नैनीताल- 30.1
- देहरादून-25.8
- हरिद्वार-22.1
- ऊधमसिंह नगर-20.4
- पिथौरागढ़-17.0
- रुद्रप्रयाग-16.7
- अल्मोड़ा-16.3
- चम्पावत-16.3
- टिहरी-15.0
- बागेश्वर-12.4
- गढ़वाल-9.4
- चमोली-8.8
- उत्तरकाशी-6.2
