देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा दावों की खुली पोल: ग्रीन कॉरिडोर पर छह KM तक अंधेरा, स्ट्रीट लाइटें बंद
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का करीब छह किमी हिस्सा रात में अंधेरे में डूबा रहता है, क्योंकि स्ट्रीट लाइटें या तो लगी नहीं हैं या खराब पड़ी हैं।

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर बनी एलिवेटेड रोड पर स्ट्रीट लाइट बंद होने से पसरा अंधेरा। जागरण
HighLights
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर छह किमी कॉरिडोर अंधेरे में
आशारोड़ी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटें बंद, हादसों का खतरा
वन्यजीव कॉरिडोर पर साउंड प्रूफ शीट भी कई जगह गायब
वत्सल गुप्ता, देहरादून। एशिया के सबसे लंबे एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर पर विकास की चमक रात होते ही अंधेरे में गुम हो जाती है। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के इस महत्वपूर्ण हिस्से पर करीब छह किमी तक अंधेरा पसरा है। कहीं स्ट्रीट लाइट लगी ही नहीं और जहां लगी हैं, उनमें से 100 से अधिक बंद पड़ी हैं। हाल यह है कि हादसों के लिए संवेदनशील आशारोड़ी जैसे क्षेत्र से गुजरना रात में वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा हो गया है।
उत्तराखंड सीमा से सहारनपुर के गणेशपुर तक करीब 14 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर पर सैकड़ों स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। मगर दून की सीमा में आते ही व्यवस्था की तस्वीर बदल जाती है। आशारोड़ी से टनल तक करीब चार किलोमीटर हिस्से में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था ही नहीं की गई है।
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के दावों की खुली पोल, दून के हिस्से में लाइट तक नहीं लगी
एक्सप्रेसवे शुरू हुए महीनों बीतने के बाद भी इस महत्वपूर्ण हिस्से में रोशनी की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। दूसरी ओर, एलिवेटेड कॉरिडोर पर लगी लाइटों में भी बड़ी संख्या में खराब हैं। शाम ढलते ही करीब छह किलोमीटर हिस्सा अंधेरे में डूब जाता है। तेज रफ्तार वाहनों वाले एक्सप्रेसवे पर यह स्थिति सीधे सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।
जिस कॉरिडोर को सुरक्षित और आधुनिक परिवहन की मिसाल के रूप में पेश किया गया, उसी पर रात में रोशनी तक न होना सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
हादसों वाले हिस्से में भी रोशनी का इंतजार
आशारोड़ी क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद इस संवेदनशील हिस्से में रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं है। अंधेरे में सड़क पर बने बैरियर और दूसरी संरचनाएं वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ा रही हैं। इतना ही नहीं, रात में सड़क किनारे ट्रकों के खड़े रहने से दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
हादसों के लिए बदनाम आशारोड़ी से टनल तक रात में सफर जोखिम भरा
एलिवेटेड कॉरिडोर पर वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सामान्य सफेद रोशनी के बजाय विशेष पीली रोशनी वाली स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। इसका उद्देश्य वन्यजीवों पर प्रकाश के प्रतिकूल प्रभाव को कम करना है। लेकिन जहां रोशनी ही गायब हो, वहां आधुनिक तकनीक और वन्यजीव सुरक्षा के दावे कितने कारगर हैं, यह सवाल भी खड़ा होता है।
वायाडक्ट बंद, साउंड प्रूफ शीट भी गायब
एक्सप्रेसवे पर एलिवेटेड रोड का वायाडक्ट भी फिलहाल वाहन चालकों के लिए बंद है। यहां खड़ी चट्टानों को हटाने का काम चल रहा है। मां डाट काली मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाए गए इस वायाडक्ट के बंद होने से आवाजाही प्रभावित हो रही है। वहीं, वाइल्डलाइफ कॉरिडोर पर वन्यजीवों को वाहनों के शोर से बचाने के लिए लगाई गई साउंड प्रूफ शीट भी कई जगह से गायब हो चुकी है।
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10 जगहों से शीट गायब
कहीं हादसों में शीट टूट गई तो कहीं पूरी तरह निकल चुकी है। करीब 14 किलोमीटर के कॉरिडोर में लगभग 10 स्थानों पर शीट क्षतिग्रस्त या गायब बताई जा रही है। ऐसे में जिस व्यवस्था का उद्देश्य वन्यजीवों को एक्सप्रेसवे के शोर से बचाना था, उसकी देखरेख पर भी सवाल उठ रहे हैं।
