देहरादून में सरकारी फ्लैटों पर भरोसा, निजी बिल्डरों पर भारी एमडीडीए की योजनाएं; 450 HIG फ्लैट बुक
देहरादून में एमडीडीए की आईएसबीटी और आमवाला तरला आवासीय योजनाएं खरीदारों का भरोसा जीत रही हैं। कम लागत, पारदर्शी प्रक्रिया और समय पर निर्माण के कारण सभ ...और पढ़ें

एमडीडीए की आइएसबीटी आवासीय परियोजना में निर्मित एचआइजी फ्लैट। प्राधिकरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, देहरादून। दून में घर खरीदने वालों का भरोसा अब सरकारी आवासीय योजनाओं की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
इसका प्रत्यक्ष प्रमाण मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की आइएसबीटी और आमवाला तरला आवासीय योजना है, जहां सभी एचआइजी फ्लैट बुक हो चुके हैं।
आइएसबीटी योजना में कुल 338 एचआइजी फ्लैट हैं, जबकि आमवाला तरला में 112 एचआइजी फ्लैट। प्राधिकरण की कम कीमत, पारदर्शी प्रक्रिया और तय समय में निर्माण ने लोगों को सरकारी विकल्प की ओर आकर्षित किया है।
एमडीडीए के अनुसार आइएसबीटी हाउसिंग योजना में 'पहले आओ-पहले पाओ' आधार पर सभी एचआइजी फ्लैट आवंटित हो चुके हैं।
आमवाला तरला की निर्माणाधीन योजना में भी इसी श्रेणी के सभी फ्लैट बुक हो गए हैं। जून 2024 में दोबारा शुरू की गई इस योजना को लगातार अच्छा प्रतिसाद मिलता रहा और अब इसकी पूरी बुकिंग हो चुकी है।
प्राधिकरण का कहना है कि योजनाओं की सफलता के पीछे निर्माण गुणवत्ता और पारदर्शी प्रक्रिया सबसे बड़ा कारण है।
निजी परियोजनाओं में जहां कीमत अधिक होने, अतिरिक्त शुल्क और निर्माण में देरी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं, वहीं एमडीडीए की योजनाओं में कम लागत पर बेहतर गुणवत्ता और स्पष्ट आवंटन प्रक्रिया ने भरोसा बढ़ाया है।
आमवाला तरला योजना बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के कारण तेजी से पसंद की जा रही है। यहां पार्किंग, जलापूर्ति, हरित क्षेत्र और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।
दूसरी ओर आइएसबीटी योजना परिवहन केंद्र के निकट होने के कारण शुरू से मांग में रही एवं अब सभी फ्लैटों की बुकिंग ने इसकी साख और मजबूत कर दी है। दून में तेजी से बढ़ती आबादी के बीच किफायती आवास की चुनौती बनी हुई है।
ऐसे में एमडीडीए की योजनाएं सुनियोजित शहरी विकास का माडल बन रही हैं। प्राधिकरण अब शहर में नई परियोजनाओं और भूमि बैंक पर भी काम कर रहा है, ताकि आने वाले समय में अधिक लोगों को व्यवस्थित और किफायती आवास उपलब्ध कराया जा सके।
इसलिए बदल रहा है लोगों का भरोसा
देहरादून के आवास बाजार में अब खरीदार केवल चमकदार विज्ञापनों के आधार पर निर्णय नहीं ले रहे, बल्कि लागत, भरोसे और समयसीमा को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि निजी बिल्डरों की तुलना में सरकारी फ्लैटों की मांग में वृद्धि हुई है।
एमडीडीए की योजनाओं में कम कीमत के साथ सरकारी निगरानी और बुनियादी सुविधाओं का भरोसा मिलने से मध्यमवर्गीय परिवार इन्हें सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब उनमें गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो। एमडीडीए की ओर से निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाती है। पहले आओ-पहले पाओ माडल ने जनता के बीच विश्वास कायम किया है और बुकिंग प्रक्रिया को सरल किया है। भविष्य की योजनाओं में भी जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।
-बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष एमडीडीए
यह भी पढ़ें- एमडीडीए ने लिए कई अहम फैसले. देहरादून में बनेगा शिव और हरित पार्क; अवैध निर्माण पर शिकंजा
यह भी पढ़ें- दून में एमडीडीए ने सख्ती दिखाते हुए लिया बड़ा फैसला, दो से अधिक मंजिल वाले बिल्डर फ्लोर पर प्रतिबंध