उत्तराखंड: सार्वजनिक उपक्रमों, बिजली चोरी, सड़क सुरक्षा पर कैग ने दिखाया आईना
कैग रिपोर्ट ने उत्तराखंड के सार्वजनिक उपक्रमों, नमामि गंगे और मनरेगा में गंभीर अनियमितताएं उजागर की हैं। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों की बदहाली, नमामि गंगे के संचालन में अनियमितता और मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
मनरेगा का लाभ लक्ष्य से काफी कम व्यक्तियों और परिवारों को मिल पाया। वहीं बिजली की चोरी रुकने का नाम नहीं ले रही है।
इस पर रोक लगाने के लिए पृथक थाने की स्थापना का प्रस्ताव धूल फांक रहा है। कैग की विभिन्न विभागों एवं योजनाओं से संबंधित ये रिपोर्ट गैरसैंण में विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन के पटल पर रखी गईं।
राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बंदी की कगार पर हैं। इनके घाटे में रहने के कारण सरकार को 1200 करोड़ से अधिक की हानि उठानी पड़ रही है।
कैग की रिपोर्ट में उपक्रमों की दयनीय अवस्था सामने आई है। प्रदेश के कुल 32 में से नौ उपक्रमों की हालत पतली है। ये अपने संसाधनों के स्थान पर सरकार से मिलने वाली सहायता पर संचालित हो रहे हैं।
इन उपक्रमों पर 4,939.53 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके बावजूद उनकी स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है।
कैग ने संभागीय परिवहन कार्यालयों की कार्यप्रणाली में खामियों को उजागर किया है। राज्य के संभागीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) और सहायक संभागीय परिवहन कार्यालयों (एआरटीओ) में वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने, परमिट प्रबंधन, कर संग्रह, सड़क सुरक्षा और प्रवर्तन व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आई हैं।
बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के हजारों वाहन चल रहे हैं। अन्य रिपोर्ट में गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता के लिए नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े किए गए हैं।
वर्ष 2018 से 2023 की इस रिपोर्ट में बताया गया कि केवल देवप्रयाग तक ही गंगा का पानी आचमन के योग्य है।
मनरेगा में पकड़ी अनियमितता
कैगने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में प्रदेश में भी अनियमितता पकड़ी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष पौने पांच लाख से साढ़े छह लाख तक औसतन प्रति परिवार 21 दिन ही मिला रोजगार प्राप्त हो सका।
एक रिपोर्ट में प्रदेश में विद्युत हानि की सच्चाई सामने रख दी है। जहां वितरण हानि सबसे ज्यादा है, इनमें रुड़की, लालकुआं, पिथौरागढ़, देहरादून और कर्णप्रयाग हैं। एक अन्य रिपोर्ट में देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में स्मार्ट रोड, ड्रेनेज और सीवरेज कार्यों को पूरा नहीं करने पर आपत्ति जताई है।